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#NewsBytesExplainer: असम में ऐतिहासिक मतदान, केरलम में 39 साल का रिकॉर्ड टूटा; क्या हैं मायने? 
असम, केरलम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान हुआ है

#NewsBytesExplainer: असम में ऐतिहासिक मतदान, केरलम में 39 साल का रिकॉर्ड टूटा; क्या हैं मायने? 

लेखन आबिद खान
Apr 10, 2026
12:16 pm

क्या है खबर?

असम, पुडुचेरी और केरलम में हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। असम का गठन होने के बाद से वहां अब तक का सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसी तरह केरलम में 1987 के बाद से सबसे ज्यादा वोट पड़े हैं। पुडुचेरी में भी आजादी के बाद से सबसे ज्यादा मतदान हुआ है। आइए तीनों जगहों पर हुए ऐतिहासिक मतदान के मायने समझते हैं।

असम

असम के 26 जिलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा वोट पड़े

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, असम में 85.91 प्रतिशत मतदान हुआ है। पिछले चुनाव में ये आंकड़ा 82.42 प्रतिशत और 2016 में 84.72 प्रतिशत था। ये राज्य में अब तक का सबसे बड़ा मतदान प्रतिशत भी है। असम के 26 जिलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ। सबसे ज्यादा 95.56 प्रतिशत मतदान साउथ सलमारा मनकचर जिले में हुआ। सबसे कम 75.25 प्रतिशत वोट पश्चिम कार्बी आंगलॉन्ग में हुई।

केरलम

केरल की 140 सीटों पर 75 प्रतिशत से ज्यादा मतदान

केरलम में 78.87 प्रतिशत मतदान हुआ है। ये 1987 के बाद से सबसे ज्यादा है। 1987 में रिकॉर्ड 80.54 प्रतिशत मतदान हुआ था। यहां के 2 जिलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा वोट डले हैं, जबकि 10 जिलों में ये आंकड़ा 70 प्रतिशत से ज्यादा है। सबसे ज्यादा 81.32 प्रतिशत मतदान कोझिकोड में, जबकि सबसे कम 70.76 प्रतिशत मतदान पथनमथिट्टा में हुआ है। वहीं, 140 सीटों पर 75 प्रतिशत से ज्यादा वोट डले हैं।

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पुडुचेरी

पुडुचेरी में भी इतिहास का सबसे ज्यादा मतदान

पुडुचेरी में भी आजादी के बाद सबसे ज्यादा 89.87 प्रतिशत मतदान हुआ है। इससे पहले 2006 में 86 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले थे। सबसे ज्यादा 90.47 प्रतिशत मतदान पुडुचेरी जिले में हुआ है। इस जिले में सबसे ज्यादा 23 सीटें हैं। वहीं, कराईकल में 86.77 प्रतिशत वोटिंग हुई। यहां 5 सीटें हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ये चुनाव न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक मिसाल है।

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वजह

क्यों बढ़े मतदान के आंकड़े?

केरल और पुडुचेरी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद ये पहले चुनाव थे, जबकि असम में 2023 के परिसीमन अभ्यास के बाद पहली बार मतदान हुआ। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि इस बार बांग्लादेशी मूल के मुस्लिम समाज और असमिया समाज में मतदान को लेकर प्रतियोगिता रही। उन्होंने कहा कि इस साल जो स्थानीय असम के लोग हैं, उन्होंने भी 90 प्रतिशत तक मतदान किया है।

केरलम की वजह

केरलम में क्यों हुआ रिकॉर्ड मतदान?

CPI(M) का मानना है कि SIR के बाद मतदाताओं के नाम हटने से मतदान प्रतिशत बढ़ा है। वहीं, पिनरई विजयन 10 साल से मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में उनके खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी को भी इसकी वजह माना जा रहा है। भाजपा को भी इस राज्य में कुछ शुरुआती सफलताएं मिली हैं, जिससे वो उत्साहित है। दैनिक भास्कर के मुताबिक, सबरीमाला के मुद्दे पर मतदाताओं में नाराजगी हैं। खासतौर पर महिलाओं में, जिन्हें CPI(M) का कोर वोटर माना जाता है।

मायने

क्या हैं मायने?

चुनावों में आमतौर पर जब इतना ज्यादा मतदान होता है, तो उसे सत्ता में बदलाव या मजबूत जनसमर्थन से जोड़कर देखा जाता है। या तो जनता सरकार हटाने के मूड में होती है या फिर उसे मजबूत जनसमर्थन देना चाहती है। केरलम में लगातार 10 साल से लेफ्ट की सरकार है। इसी तरह असम में 2016 से भाजपा की सरकार है। वहीं, पुडुचेरी में भी एन रंगास्वामी करीब 17 साल (लगातार नहीं) से मुख्यमंत्री हैं।

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