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पश्चिम बंगाल: SIR की अंतिम सूची में 61 लाख नाम कटे, 60 लाख मतदाता 'विचाराधीन'
पश्चिम बंगाल में SIR की अंतिम सूची जारी कर दी गई है

पश्चिम बंगाल: SIR की अंतिम सूची में 61 लाख नाम कटे, 60 लाख मतदाता 'विचाराधीन'

लेखन आबिद खान
Feb 28, 2026
05:44 pm

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने अंतिम सूची जारी कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि सूची से 61,78,245 वोटर्स के नाम हटा दिए गए हैं। राज्य में अब 7,04,59,284 मतदाता हैं। वहीं, करीब 60 लाख मतदाताओं को 'विचाराधीन' श्रेणी में रखा गया है। इससे पहले ड्राफ्ट सूची में 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के लिए चिह्नित किए गए थे।

जिले

किस जिले से कितने नाम कटे?

बांकेुरा जिले में अंतिम सूची से लगभग 1.18 लाख और नादिया जिले से 2.73 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उत्तर कोलकाता में अंतिम ड्राफ्ट में करीब 17,000 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। दक्षिण कोलकाता में यह संख्या 3,207 है, जबकि 78,675 मतदाताओं के नामों पर अभी फैसला होना बाकी है। अलीपुरद्वार जिले में अंतिम सूची में 11,96,651 नाम शामिल हैं, जबकि कुल हटाए गए नामों की संख्या 1,02,835 बताई गई है।

विधानसभा

मुख्यमंत्री की विधानसभा सीट से 47,000 नाम कटे

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। यहां से कुल 47,000 से ज्यादा मतदाताओं के नाम काटे गये हैं। इनमें से करीब 14,000 अभी अनसुलझे हैं। SIR प्रक्रिया से पहले यहां मतदाताओं की संख्या 2,63,295 थी। ड्राफ्ट सूची में इनमें से 44,786 लोगों के नाम हटाए गए थे। अब अंतिम सूची में से 2,324 और लोगों के नाम हटाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता पोर्ट से सबसे ज्यादा 63,7330 नाम हटाए गए हैं।

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ड्राफ्ट सूची

ड्राफ्ट सूची में क्या-क्या सामने आया था?

राज्य की ड्राफ्ट सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित हुई थी, जिसमें मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई थी। सूची में मृत्यु, डुप्लीकेट नाम और पता बदलने के चलते 58 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए थे। दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई हुई, जिनमें से 1.36 करोड़ मतदाताओं के संदर्भ में 'तार्किक विसंगतियां' पाई गईं। वहीं, 31 लाख मतदाताओं को मैपिंग से बाहर बताया गया।

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सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, खुद ममता बनर्जी हुई थीं पेश

तृणमूल कांग्रेस (TMC) SIR की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। इस दौरान एक अभूतपूर्व कदम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें रखी थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रक्रिया के जरिए लाखों वास्तविक मतदाताओं पर मतदान प्रक्रिया से बाहर होने का खतरा है। उन्होंने कहा था, "यह संशोधन नहीं, बल्कि जानबूझकर नाम हटाने की कवायद है। विसंगतियों का बहाना बनाकर वास्तविक नामों को हटाया जा रहा है।"

प्लस

न्यूजबाइट्स प्लस

SIR एक तरह से नई मतदाता सूची बनाने की प्रक्रिया है, जिसमें गहन तरीके से मतदाताओं की जानकारी इकट्ठा की जाती है। इस आधार पर मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। चुनाव आयोग मतदाता सूची में 3 तरह से सुधार करता है। एक समरी रिवीजन, दूसरा गहन पुनरीक्षण और तीसरा विशेष संशोधन। SIR के लिए घर-घर जाकर लोगों की गणना की जाती है, फिर निर्धारित दस्तावेजों के निरीक्षण के बाद उनका नाम सूची में शामिल या हटाया जाता है।

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