
उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने संबंधी केंद्रीय मंत्री के बयान पर बवाल, भाजपा-शिवसेना के कार्यकर्ता भिड़े
क्या है खबर?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने संबंधी केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बयान से राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उनके खिलाफ राज्य भर में कम से कम तीन FIR दर्ज की गई हैं और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है। पुलिस चिपलून भी गई है जहां राणे के होने की संभावना है।
मामले को लेकर मुंबई में भाजपा और शिवसेना के कार्यकर्ता भी भिड़ गए और उनके बीच पथराव हुआ।
विवादित बयान
नारायण राणे ने क्या कहा था?
सोमवार को रायगढ़ में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए नारायण राणे ने दावा किया था कि उद्धव ठाकरे 15 अगस्त के अपने भाषण के दौरान आजादी के साल भूल गए थे।
उन्होंने कहा था, "यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि आजादी को कितने साल हुए हैं। भाषण के दौरान वह पीछे मुड़ कर इस बारे में पूछताछ करते नजर आए थे। अगर मैं वहां होता तो उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारता।"
भिड़ंत
मुंबई में भिड़े शिवसेना और भाजपा के कार्यकर्ता
राणे के इस बयान पर शिवसेना के नेता और कार्यकर्ता आगबूबला हो गए हैं और आज सुबह पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने नागपुर में भाजपा के कार्यालय पर पत्थर फेंके।
इसके अलावा मुंबई में शिवसेना और भाजपा के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। शिवसेना के कार्यकर्ता राणे के जुहू स्थिति घर के सामने प्रदर्शन करने जा रहे थे, तभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोक लिया।
दोनों तरफ से पथराव भी हुआ जिसके बाद शिवसेना के कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए।
तीखा हमला
शिवसेना सांसद ने कहा- मानसिक संतुलन खो चुके हैं राणे
शिवसेना सांसद विनायक राउत ने मामले में राणे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "भाजपा नेतृत्व को खुश करने के लिए राणे शिवसेना और उसके नेताओं को निशाना बना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में जगह मिलने के बाद वह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। मोदी को उन्हें बाहर कर देना चाहिए।"
वहीं शिवसेना की युवा इकाई युवा सेना ने राज्यभर में पोस्टर लगाए हैं जिसमें राणे को 'मुर्गी चोर' कहा गया है।
राजनीतिक सफर
नारायण राणे ने शिवसेना से ही की थी अपनी राजनीति की शुरूआत
बता दें कि नारायण ठाकरे पहले शिवसेना के ही नेता रहे हैं और उन्होंने बाल ठाकरे के नेतृत्व में मुंबई से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी।
1990 में वह पहली बार शिवसेना की टिकट पर विधायक चुने गए और 1999 में मुख्यमंत्री भी रहे। हालांकि साल के अंत में हुए चुनाव में शिवसेना और भाजपा की हार के कारण उनका कार्यकाल चंद महीने ही चला।
ठाकरे परिवार से विवाद के कारण उन्होंने 2005 में शिवसेना छोड़ दी।
सफर
शिवसेना छोड़ पहले कांग्रेस और फिर भाजपा में शामिल हुए राणे
शिवसेना छोड़ने के बाद राणे पहले कांग्रेस में शामिल हो गए और उसकी महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे। 2017 में उन्होंने कांग्रेस भी छोड़ दी और पार्टी पर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का वादा पूरा न करने का आरोप लगाया।
इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई जिसका बाद में भाजपा में विलय कर दिया। जुलाई में हुई कैबिनेट विस्तार में उन्हें मोदी सरकार में जगह दी गई और अभी वे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री हैं।