महाराष्ट्र: अजित-सुप्रिया साथ आए फिर भी पुणे में NCP की करारी हार, क्या होगा असर?
क्या है खबर?
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के लिए अच्छी खबर नहीं आई है। बंटवारे के बाद पार्टी के दोनों धड़ों ने पहली बार साथ आते हुए पुणे और पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम का चुनाव लड़ा था, लेकिन यहां भाजपा को जीत मिली है। ये हार इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि पुणे को पवार परिवार का गढ़ माना जाता है। इस हार ने पवार परिवार के असर के साथ उनके राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल उठा दिए हैं।
भाजपा
भाजपा ने कैसे NCP को चटाई धूल?
भाजपा ने इन चुनावों में विरोधी राजनीतिक पार्टियों के मजबूत उम्मीदवारों को तोड़ा। इनमें NCP(SP) विधायक बापू पठारे के बेटे सुरेंद्र और बहू ऐश्वर्या बड़ा नाम थे। पठारे की वडगांव शेरी विधानसभा में अच्छी पकड़ मानी जाती है और पहले स्थानीय निकायों में पद संभाल चुके हैं। इसके अलावा पूर्व कांग्रेस राज्य मंत्री बालासाहेब शिवरकर के बेटे अभिजीत शिवरकर, NCP(SP) के सचिन डोडके और NCP की सायली वांजले और बाला धनकावड़े जैसे कई पूर्व पार्षदों को भी साथ लिया।
रिश्तेदार
काम कर गई भाजपा की ये रणनीतियां
भाजपा ने पिछली बार चुनाव जीते 97 पार्षदों में से 30 का टिकट काटा। इनकी जगह जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को मौका दिया गया। विरोध के बावजूद जीतने की क्षमता को उम्मीदवार चयन का मुख्य पैमाना बनाया गया। भाजपा ने तय किया कि मौजूदा विधायकों या सांसदों के किसी भी रिश्तेदार को नगर निगम चुनावों में लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया जाएगा।केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, राज्य मंत्री माधुरी मिसाल समेत कई सांसदों-विधायकों के रिश्तेदारों को टिकट नहीं मिला।
असर
दोनों NCP गुटों के साथ आने की संभावना खत्म?
पुणे की हार से पवार परिवार के राज्य और केंद्र स्तर पर फिर से एकजुट होने की अटकलों पर भी विराम लग गया है। पहले चर्चाएं थीं कि दोनों गुट साथ आएंगे और सुप्रिया सुले को एक अहम पद दिया जा सता है। हालांकि, जमीनी हकीकत ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जब तक कि महाराष्ट्र में परिवारों और राजनीतिक गठबंधनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, तब तक ऐसा होने की गुंजाइश कम ही है।
असर
नतीजों का क्या होगा असर?
अजित की मंशा रही होगी कि पुणे में बड़ी जीत दर्ज कर महायुति में अपनी स्थिति मजबूत कर लें। इससे भविष्य के चुनावों में भी उनकी तोल-मोल करने की क्षमता बढ़ जाती। वहीं, शरद पवार चाह रहे होंगे कि अगर पुणे में दोनों NCP का गठबंधन कमाल कर दिखाता तो महाविकास अघाड़ी में उनका और उनकी बेटी सुप्रिया का कद काफी बढ़ जाता। शायद NCP के एक होने का रास्ता भी खुल जाता।
अजित
लगातार गिर रहा NCP के दोनों गुटों का प्रदर्शन
2024 के लोकसभा चुनावों मे शरद पवार की NCP ने 10 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की थीं। इसके बाद से पार्टी का प्रदर्शन लगातार गिर रहा है। ये नतीजे पार्टी की राजनीतिक प्रासंगिकता और अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं। वहीं, अजित के नेतृत्व वाली NCP के लिए चुनावी विफलता भाजपा के बढ़ते कद के आगे उसके अस्तित्व के लिए चुनौती है। भले ही वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के सहयोगी बने हुए हैं।
नतीजे
अब नतीजे जान लीजिए
खबर लिखे जाने तक पुणे की 165 सीटों में से भाजपा ने 110 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि दोनों NCP मिलकर भी केवल 14 सीटों पर ही जीत मिली। वहीं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को एक और कांग्रेस और शिवसेना (UBT) को 9 सीटों पर जीत मिली है। पिंपरी-चिंचवड़ की 128 में से भाजपा 84 और NCP 37 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है। शिंदे की शिवसेना 6 और MVA खाता भी नहीं खोल पाया है।