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#NewsBytesExplainer: महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों में क्या हैं प्रावधान, दक्षिणी राज्य क्यों कर रहे विरोध?
संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर 3 अहम विधेयक पेश किए जाएंगे

#NewsBytesExplainer: महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों में क्या हैं प्रावधान, दक्षिणी राज्य क्यों कर रहे विरोध?

लेखन आबिद खान
Apr 15, 2026
02:09 pm

क्या है खबर?

केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस दौरान 3 अहम विधेयक पेश किए जाएंगे, जो महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की दिशा में अहम हैं। इनमें लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। साथ ही लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन भी किए जाने का प्रस्ताव है। आइए जानते हैं तीनों विधेयक में क्या-क्या अहम प्रावधान हैं।

विधेयक

सबसे पहले तीनों विधेयकों के बारे में जानिए

इन विधेयकों के नाम संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 हैं। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में लोकसभा की सीटें 850 करने का प्रस्ताव है। परिसीमन (संशोधन) विधेयक में परिसीमन आयोग के गठन और नई जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा करने का प्रावधान है। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक में दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन का प्रावधान है।

सीटें

850 होंगी लोकसभा की सीटें

सरकार ने लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इनमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। फिलहाल लोकसभा में 543 सीटें हैं। इसका उद्देश्य महिला आरक्षण को लागू करना और परिसीमन का नया चरण शुरू करना है। माना जा रहा है कि ये बदलाव 2029 के आम चुनावों से लागू हो सकता है। नए संसद भवन को सांसदों की ज्यादा संख्या के हिसाब से बनाया गया है।

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महिला आरक्षण

महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी 273 सीटें

विधेयक में प्रावधान है कि लोकसभा की कुल सीटों में से 33 प्रतिशत यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा। यानी 2039 के लोकसभा चुनावों तक। इस विधेयक में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इन सीटों का निर्धारण भी रोटेशन के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में किया जाएगा।

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परिसीमन

कैसे होगा परिसीमन?

फिलहाल लोकसभा सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर है और नए परिसीमन पर रोक लगी हुई है। विधेयक के जरिए रोक को हटाने का प्रस्ताव है। विधेयक पारित होने के बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। इसका काम नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का पुनर्निर्धारण करना होगा। 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हो सकता है।

सीटें

परिसीमन के बाद किस राज्य में कितनी सीटें बढ़ सकती हैं?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश में 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां सीटें 80 हैं। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी और लोकसभा सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। वहीं, बिहार में महिला आरक्षित सीटों की संख्या 20 हो सकती है और कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 15, तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 हो जाएगी।

विरोध

दक्षिण भारतीय राज्य क्यों कर रहे हैं विरोध?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने परिसीमन को लेकर सरकार का विरोध किया है। इनका कहना है कि अगर आबादी के आधार पर परिसीमन किया गया तो दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी आएगी। हालांकि, सरकार का कहना है कि सीटों की अंतिम संख्या परिसीमन आयोग द्वारा तय की जाएगी और इनका आवंटन भी आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाएगा। सरकार ने दक्षिण भारतीय राज्यों को फायदा होने का दावा किया है।

प्लस

क्या होता है परिसीमन?

समय के साथ जनसंख्या में बदलाव के कारण किसी लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया को परिसीमन कहा जाता है। परिसीमन आयोग ये कार्य करता है। यह एक स्वतंत्र निकाय होता है जिसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। इसका उद्देश्य इस तरह से सीमाएं निर्धारित करना होता है कि सभी सीटों के अंतर्गत लगभग बराबर आबादी आए। ये सीटों की संख्या घटा और बढ़ा भी सकता है।

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