CBSE को OSM लागू करने से पहले परीक्षण में मिली थी 36 गड़बड़ियां- रिपोर्ट
क्या है खबर?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से 12वीं कक्षा में लागू ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, OSM लागू करने से पहले इस साल जनवरी में दिल्ली के 5 स्कूलों में एक परीक्षण किया गया था, जिसमें 36 गड़बड़ियां मिली थीं। इनमें 'अंधाधुंध या सतही जांच' का जोखिम, कमजोर पर्यवेक्षी निगरानी, डेटा हानि समेत तकनीकी, परिचालन और मूल्यांकन संबंधी चिंताओं को उजागर किया गया था।
रिपोर्ट
लापरवाही और जल्दबाजी में लागू किया गया OSM
यह रिपोर्ट आंतरिक पर्यवेक्षकों ने तैयार की और 21 जनवरी को बोर्ड को सौंपी थी। इसके बाद भी मूल्यांकनकर्ताओं को अंकों पर विचार-विमर्श करने या आम सहमति पर पहुंचने का कोई अवसर प्रदान नहीं किया और बोर्ड परीक्षाओं से पहले इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर दिया। बोर्ड मई में परिणाम के बाद सामने आई खामियों में उन कुछ मुद्दों से अवगत था, जो जनवरी में उठे थे। हिंदुस्तान टाइम्स ने इसपर CBSE से जवाब मांगा था, जो नहीं मिला।
खुलासा
OSM में क्या-क्या मिली थी खामियां?
यह प्रणाली मूल्यांकनकर्ताओं को अंक आवंटित करते समय बातचीत करने, विचार-विमर्श करने का अवसर नहीं देती, जो निष्पक्ष-मानकीकृत मूल्यांकन के लिए आवश्यक है। इसमें 'सतही मूल्यांकन के जोखिम' की ओर इशारा है, जिसमें पढ़े बिना टिप्पणियां जोड़कर और मनमाने अंक देकर उत्तर-पुस्तिकाएं जमा की गईं, जिससे अंधाधुंध या सतही जांच के मामले सामने आए। जांच रिपोर्ट में एक ऐसी व्यवस्था का अभाव है जो अतिरिक्त मुख्य परीक्षकों (AHE) को त्रुटियां मिलने पर उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकनकर्ताओं को वापस भेज सके।
खामियां
तकनीकी रूप से भी आई समस्या
AHE अपनी पसंद की उत्तर पुस्तिकाओं की समीक्षा करने में भी असमर्थ थे, क्योंकि एप्लिकेशन स्वचालित रूप से उत्तर पुस्तिकाओं को आवंटित करता है। सत्यापन के बाद भी AHE को टिप्पणियां दिखाई नहीं देतीं और एचई पोर्टल पर संशोधनों को देखने का कोई प्रावधान नहीं है। चरण-दर-चरण अंकन के दौरान सुस्ती, ऑटो-सेव की कमी, प्रश्न पत्रों और अंकन योजनाओं को एक साथ देखने में असमर्थता, विषय-कोड में विसंगतियां जैसी कमियां मिलीं।
विवाद
क्या है CBSE का OSM विवाद?
CBSE ने इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन के लिए OSM प्रणाली शुरू की है। यह प्रणाली बोर्ड द्वारा त्वरित, डिजिटल मूल्यांकन और परिणाम के बाद पारदर्शिता को बढ़ावा देती है। दावा था कि OSM मानवीय त्रुटियों को कम करेगी और पुनर्मूल्यांकन के दौरान उत्तर-पुस्तिकाओं तक पहुंच में सुधार करेगी, लेकिन परिणाम जारी होने के बाद कई छात्रों ने गड़बड़ी की शिकायत की है। राहुल गांधी ने ये मुद्दा उठाया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गलती स्वीकारी है।