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EMI बाउंस होने से क्रेडिट स्कोर पर कैसे बढ़ सकता है असर?
EMI बाउंस से बढ़ सकती है चिंता

EMI बाउंस होने से क्रेडिट स्कोर पर कैसे बढ़ सकता है असर?

May 30, 2026
11:19 am

क्या है खबर?

EMI बाउंस होना कई लोगों को छोटी बात लग सकता है, लेकिन इसका असर सीधे क्रेडिट स्कोर तक पहुंच सकता है। अगर तय तारीख पर लोन की किस्त नहीं जाती या ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है, तो बैंक इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को भेज सकते हैं। यही वजह है कि एक छोटी देरी भी रिकॉर्ड में जुड़ सकती है। समय पर भुगतान नहीं होने पर आगे चलकर परेशानी बढ़ने लगती है और दबाव महसूस हो सकता है।

#1

देरी का रिकॉर्ड स्कोर पर डालता है असर

क्रेडिट स्कोर में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया जाता है कि आपने किस्त समय पर भरी या नहीं। अगर EMI बार-बार बाउंस होती है या देर से जमा होती है, तो यह आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री को कमजोर कर सकती है। बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाएं इसे जोखिम की तरह देख सकती हैं। इससे आगे चलकर नया लोन लेना मुश्किल हो सकता है और ब्याज दर भी पहले से ज्यादा लग सकती है।

#2

ऑटो-डेबिट की छोटी गलती भी बनती है वजह

कई बार EMI इसलिए बाउंस हो जाती है, क्योंकि अकाउंट में उस समय पैसे कम होते हैं या गलत बैंक अकाउंट लिंक रह जाता है। ग्राहक भुगतान करना चाहता है, लेकिन तकनीकी वजह से दिक्कत हो जाती है। फिर भी बैंक इसे तय समय पर पेमेंट न होने के रूप में दर्ज कर सकते हैं। ऐसे में सलाह यही रहती है कि EMI वाले अकाउंट में थोड़ा अतिरिक्त बैलेंस रखें, ताकि आखिरी समय में दिक्कत न हो।

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#3

समय रहते कदम उठाना जरूरी

अगर किसी महीने EMI भरने में परेशानी हो रही है, तो बैंक से जल्दी बात करना बेहतर माना जाता है। कई बार बैंक कुछ राहत या नया भुगतान प्लान देने पर विचार करते हैं, लेकिन अगर देरी लगातार बढ़ती जाए, तो असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री धीरे-धीरे बनती है। इसलिए छोटी गलती को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते संभालना भविष्य के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

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