I-PAC ने ऐसी कंपनी से लिया 13.5 करोड़ का कर्ज, जिसका अस्तित्व ही नहीं- रिपोर्ट
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के बाद चर्चा में आई राजनीतिक परामर्श कंपनी I-PAC को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट में बताया कि I-PAC ने 2021 में हरियाणा के रोहतक स्थित जिस फर्म से 13.50 करोड़ रुपये का 'असुरक्षित कर्ज' लिया था, वो फर्म आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। फर्म को अगस्त 2018 में कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) के रिकॉर्ड से हटा दिया गया था।
खुलासा
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट में बताया गया कि I-PAC ने 17 दिसंबर, 2021 के एक दस्तावेज में 'ऋणदाताओं की सूची' संलग्न की और घोषणा की कि उसे 'रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया (पी) लिमिटेड' कंपनी से 'असुरक्षित ऋण' के रूप में 13.50 करोड़ रुपये मिले हैं। I-PAC दस्तावेज में ऋणदाता का पता 'तीसरी मंजिल, अशोक प्लाजा, रोहतक था, जबकि रोहतक में इस पते पर ऐसी कोई कंपनी नहीं थी। ROC के रिकॉर्ड से पता चला कि 'रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया' कंपनी कभी अस्तित्व में नहीं थी।
संस्था
कंपनी 2018 में हुई बंद
रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक रिकॉर्ड में इसी नाम से एक संस्था मौजूद है जिसका नाम 'रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' है और जिसका गठन अक्टूबर 2013 में रोहतक के उसी पते पर हुआ था। हालांकि, I-PAC के कर्ज की घोषणा से 3 साल पहले, 8 अगस्त, 2018 को ROC द्वारा उस कंपनी को बंद कर दिया गया था। इस बीच जून, 2025 को I-PAC ने कहा कि उसने 2024-25 में 13.50 करोड़ रुपये कर्ज में 1 करोड़ रुपये चुकाए हैं।
जवाब
प्रतीक जैन समेत सभी ने जवाब देने से मना किया
रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल और ईमेल के जरिए I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन से इस विषय पर जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अखबार ने I-PAC की फरीदाबाद स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट पूनम चौधरी और एक सहयोगी से भी जानकारी ली, लेकिन उन्होंने भी कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। फरीदाबाद स्थित I-PAC की कंपनी सचिव तरुणा कालरा ने भी मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की।
विवाद
क्या है मामला?
पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव है। उससे पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चुनाव अभियान की जिम्मेदारी संभाल रही I-PAC के दफ्तर पर 8 जनवरी को ED की टीम ने छापा मार दिया। घटनाक्रम में तब अलग मोड़ आया, जब मुख्यमंत्री बनर्जी भी छापामारी स्थल पर पहुंच गईं और पुलिस के बल पर कई दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया। मामला कोलकाता हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। फिलहाल, अभी कोई फैसला नहीं आया है।