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लोकसभा स्पीकर बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के आरोपों पर जवाब दिया, कहा- सभी को मौका दिया
लोकसभा स्पीकर बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के आरोपों पर जवाब दिया

लोकसभा स्पीकर बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के आरोपों पर जवाब दिया, कहा- सभी को मौका दिया

लेखन गजेंद्र
Mar 12, 2026
12:27 pm

क्या है खबर?

लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को प्रश्न काल के बाद खुद के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बिंदुवार जवाब दिया। उन्होंने अपने आधे घंटे के संबोधन में कहा कि अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने कभी किसी पार्टी या नेता के साथ भेदभाव नहीं किया बल्कि सभी को समान अवसर दिया। उन्होंने सांसदों के निलंबन पर कहा कि उनके सभी सांसदों के साथ व्यक्तिगत संबंध भी हैं, लेकिन सांसद के न मानने पर यह कदम उठाना पड़ता है।

जवाब

पुरानी कार्यवाहियों का उदाहरण दिया

संसद के बजट सत्र की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई थी। हालांकि, विपक्ष की नारेबाजी के कारण प्रश्न काल नहीं हुआ और कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे बिरला ने दोबारा से कार्यवाही शुरू की और खारिज हो चुके अविश्वास प्रस्ताव के आरोपों पर एक लंबा जवाब दिया। उन्होंने कुछ पुराने नेताओं और कार्यवाहियों का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व में भी पक्ष-विपक्ष के नेता स्पीकर के आदेश को स्वीकारते आए हैं।

जवाब

मैंने हर दायित्व निभाया- बिरला

उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा प्रयास किया की सभी सदस्य विषय और नियमों पर अपने विचार व्यक्त करे, जिसके लिए मैंने पर्याप्त अवसर भी सभी को देने का प्रयास किया। मैंने संकोच करने वाले सांसदों को अपने चैंबर में बुलाकर उनको समझाया है।" बिरला ने कहा कि उन्होंने सदन के कार्य को करने के लिए अपने हर दायित्व को निभाया है और प्रयास रहता है कि सदन की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती रही।

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प्रस्ताव

किसी को नियम के तहत बोलने का अधिकार है- बिरला

बिरला ने कहा कि उन्होंने पिछले 2 दिनों में सभी सदस्यों की बात को गंभीरता से सुना है, चाहे वे समर्थन में हो या फिर आलोचना के रूप में अपने सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा, "कुछ सदस्यों ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता को बोलने से रोका जाता है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि चाहे कोई हो, सभी को नियमों के तहत बोलने का अधिकार है। नेता प्रतिपक्ष को भी नियम से ऊपर जाकर बोलने का अधिकार नहीं है।"

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जवाब

अध्यक्ष से पूर्व अनुमति के बाद ही बयान दे सकते हैं- बिरला

बिरला ने कहा कि किसी को भी नियमों से परे जाकर बोलने का अधिकार नहीं है अगर सदन के नेता को भी बोलना है तो उन्हें सदन के अध्यक्ष से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होता है। बिरला ने कहा कि 1957 में राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर अटल बिहारी वाजपेयी ने जम्मू-कश्मीर की कुछ तस्वीरों को सदन में रखना चाहा तो सदन ने उन्हें पहले स्पीकर को पेश करने को कहा, जिसका पालन अटल बिहारी ने की थी।

अनुमति

माइक बंद करने पर क्या बोले बिरला?

बिरला ने कहा, "जब भी कोई सदस्य सदन के विरूद्ध आचरण-व्यवहार करते हैं तो मुझे कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं। संसद में बोलने का अधिकार है, लेकिन वह नियम के अनुसार ही हो सकता है।" बिरला ने कहा, "कई सदस्यों ने माइक बंद करने का मुद्दा उठाया है, लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि आसन के पास माइक बंद करने का बटन नहीं होता है। जिसे बोलने की अनुमति दी जाती है, उसी का माइक खुलता है।"

जवाब

प्रधानमंत्री को सदन में न बुलाने के बारे में बिरला ने जानकारी दी

बिरला ने महिला सांसदों पर प्रधानमंत्री की बेंच के सामने प्रदर्शन के मामले में कहा कि प्रतिपक्ष की कुछ महिला सदस्य अपनी बेंच से हटकर ट्रेजरी बेंच पर जाकर नारेबाजी कर रही थीं, जिससे अप्रत्याशित स्थिति बन सकती थी। उन्होंने कहा कि ऐसी अप्रत्याशित स्थिति की संभावना को टालने की जिम्मेदारी उनकी थी, इसलिए उन्होंने सदन की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए सदन के नेता को सदन में न आने का आग्रह किया।

ट्विटर पोस्ट

ओम बिरला के भाषण का अंश

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