पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को ED ने गिरफ्तार किया, सुबह पड़ा था ठिकानों पर छापा
क्या है खबर?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। आज ही उनके सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर छापा मारा गया था। चंडीगढ़ में करीब 20 गाड़ियों में पहुंचे ED अधिकारियों ने भारी सुरक्षा के बीच सुबह तलाशी ली थी। इस कार्रवाई पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कार्रवाई को राजनीतिक बदला बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।
छापा
कहां-कहां पड़े छापे?
अधिकारियों ने बताया कि चंडीगढ़ स्थित अरोड़ा के आधिकारिक आवास और हरियाणा के गुरुग्राम में एक रियल एस्टेट कंपनी सहित 5 परिसरों पर छापे मारे गए। इनमें दिल्ली, गुड़गांव और चंडीगढ़ में हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के कार्यालय परिसर शामिल हैं। ये मामला कथित तौर पर अरोड़ा द्वारा अपनी कंपनी के माध्यम से किए गए मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से जुड़ा है, जिसमें 100 करोड़ रुपये से अधिक के मोबाइल की फर्जी GST खरीद शामिल है।
बयान
भगवंत मान बोले- पंजाब कभी नहीं झुकेगा
भगवंत मान ने कहा, 'आज फिर भाजपा की ED संजीव अरोड़ा के घर आई है। एक साल में यह तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार। फिर भी उन्हें कुछ नहीं मिला। मैं मोदी जी से कहना चाहता हूं कि पंजाब गुरुओं की धरती है; औरंगजेब भी इसे झुका नहीं पाया था। यह भगत सिंह की धरती है, जिन्होंने अंग्रेजों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया; इसलिए पंजाब मोदी की चालों के आगे कभी नहीं झुकेगा।'
केजरीवाल का बयान
केजरीवाल बोले- ED-CBI का इस्तेमाल नेताओं को धमकाने के लिए हो रहा
अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर एजेंसियों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "ED और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर करने के लिए किया जा रहा है। जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, CBI-ED भ्रष्टाचार को रोकने के लिए नहीं, बल्कि दूसरी पार्टियों को तोड़ने और नेताओं को धमकाकर भाजपा में शामिल कराने के लिए कर रही हैं।"
मामला
क्या है कथित घोटाला?
जांच के मुताबिक, अरोड़ा ने अपनी कंपनी के जरिए मोबाइल फोन की 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की फर्जी GST खरीद दिखाकर बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग की है। शेल कंपनियों और नकली खरीद इनवॉइस के जरिए कथित तौर पर 157.12 करोड़ रुपये की नकली बिक्री और फर्जी निर्यात किए गए। ED का मानना है कि FEMA नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करते हुए विदेशी कंपनियों के जरिए पैसों का हेरफेर किया गया।