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#NewsBytesExplainer: परिसीमन किस आधार पर होगा और किस राज्य में कितनी सीटें बढ़ेंगी?
परिसीमन के बाद राज्यों की लोकसभा सीटों में क्या बदलाव होगा जानिए

#NewsBytesExplainer: परिसीमन किस आधार पर होगा और किस राज्य में कितनी सीटें बढ़ेंगी?

लेखन आबिद खान
Apr 16, 2026
07:23 pm

क्या है खबर?

संसद के विशेष सत्र के दौरान आज लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 3 विधेयक पेश किए गए हैं। इनके जरिए सरकार लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने जा रही हैं, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि हर राज्य की कुल लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। आइए समझते हैं राज्यों की सीटों में क्या बदलाव होगा।

परिसीमन

सबसे पहले जानिए क्या होता है परिसीमन

किसी लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया को परिसीमन कहा जाता है। दरअसल, समय के साथ किसी भी क्षेत्र की जनसंख्या में बदलाव होना स्वाभाविक है। इसलिए परिसीमन के जरिए बदली हुई आबादी को समान रूप से प्रतिनिधित्व दिया जाता है। परिसीमन आयोग ये कार्य करता है। यह एक स्वतंत्र निकाय होता है जिसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। परिसीमन से सीटों की संख्या कम या ज्यादा हो सकती है।

आधार

किस आधार पर होगा परिसीमन?

नियम कहता है कि परिसीमन हमेशा ताजा जनगणना के आधार पर होना चाहिए। देश में फिलहाल जनगणना हो रही है, लेकिन अगर इसके हिसाब से किया गया, तो महिला आरक्षण 2034 के लोकसभा चुनावों में लागू हो पाएगा। इससे पहले आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। माना जा रहा है कि इसके आंकड़ों को आधार बनाया जा सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि हर राज्य में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएंगी।

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2011

2011 की जनगणना के आधार पर किस राज्य में कितनी सीटें बढ़ेंगी?

अगर परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होता है, तो तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 50, केरल की 20 से 23, आंध्र प्रदेश की 25 से 34, कर्नाटक की 28 से 42, उत्तर प्रदेश की 80 से 138, बिहार की 40 से 72, राजस्थान की 25 से 47, मध्य प्रदेश की 29 से 50, महाराष्ट्र की 48 से 72, तेलंगाना की 42 से 63, पंजाब की 13 से 19 और गुजरात की 26 से 42 हो जाएगी।

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आनुपातिक प्रतिनिधित्व

आनुपातिक प्रतिनिधित्व के हिसाब से कितनी बढ़ेंगी सीटें?

आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर केरल में 31, तमिलनाडु में 61, तेलंगाना में 66, कर्नाटक में 44, पंजाब में 20, गुजरात में 41, हरियाणा में 16, झारखंड में 22, महाराष्ट्र में 75, दिल्ली में 11, मध्य प्रदेश में 45, राजस्थान में 39, बिहार में 63, उत्तर प्रदेश में 125, ओडिशा में 33, छत्तीसगढ़ में 17 और असम में 21 सीटें होंगी। यानी अगर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ तो दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा।

दक्षिणी राज्य

दक्षिणी राज्य क्यों कर रहे हैं विरोध?

दक्षिणी राज्यों को डर है कि इससे लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। द हिंदू अखबार के अनुसार, मौजूदा प्रस्ताव के तहत, भाजपा के प्रभुत्व वाले हिंदी भाषी राज्यों में लोकसभा सीटों का हिस्सा 38.1 प्रतिशत से बढ़कर 43.1 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं, दक्षिणी राज्यों में सीटों का हिस्सा 24.3 प्रतिशत से घटकर 20.7 प्रतिशत हो जाएगा। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश का हिस्सा 14.73 प्रतिशत से बढ़कर 16.24 और बिहार का 7.37 से बढ़कर 8.47 प्रतिशत हो जाएगा।

अगला कदम

आगे क्या होगा?

सरकार पहले तीनों विधेयकों को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराएगा। इनके कानून बनने के बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव आयुक्त इसके सदस्य होते हैं। हर राज्य के लिए 5 लोकसभा और 5 विधानसभा सदस्य सहयोगी सदस्य होते हैं। माना जा रहा है कि 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल सकता है।

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