परिसीमन पर प्रधानमंत्री मोदी बोले- दक्षिण, उत्तर या छोटे-बड़े किसी के साथ भी भेदभाव नहीं होगा
क्या है खबर?
संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 विधेयक लोकसभा में पेश किए गए। इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "भारत के संसदीय लोकतंत्र का इतिहास में ये अहम पल है। जरूरत तो ये थी कि 25-30 साल पहले ही हम इसे लागू कर देते और आज परिरक्वता तक पहुंचा देते। समय-समय पर इसमे सुधार भी होते।"
बयान
प्रधानमंत्री ने कहा- आधी आबादी देश की नीति निर्धारण का हिस्सा बने
प्रधानमंत्री ने कहा, "दुनिया में भी भारत की स्वीकृति हम सब महसूस करते हैं। ये हमारे लिए गौरव का पल है। एक समय हमारे पास आया है। मैं पक्का मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब केवल रेल, रास्ते, आर्थिक प्रगति से नहीं है। हम चाहते हैं कि विकसित भारत के नीति निर्धारण में सबका साथ सबका विकास का मंत्र हो। देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने। ये समय की मांग है। "
गारंटी
प्रधानमंत्री ने दी किसी के साथ भी भेदभाव न होने की गारंटी
प्रधानमंत्री ने परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं पर कहा, "छोटे-बड़े, उत्तर या दक्षिण किसी भी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। मैं इसकी गारंटी देने को तैयार हूं। अगर गांरटी शब्द चाहिए तो मैं वह शब्द भी उपयोग करता हूं, वादा की बात करते हो तो उसे भी इस्तेमाल करता हूं। तमिल में कोई शब्द हो तो मैं उसे भी कहता हूं। क्योंकि जब नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।"
संबोधन
प्रधानमंत्री ने सभी पार्टियों से साथ आने की अपील की
प्रधानमंत्री ने कहा, "महिलाओं के विकास का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि तब सभी पार्टियों ने सहमति से महिला आरक्षण विधेयक को पारित किया। इससे किसी का नुकसान नहीं हुआ। तब सब साथ में थे। आज मैं कहता हूं कि अगर सब साथ में रहते हैं, तो ये किसी के पक्ष में नहीं जाएगा। ये लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा।"
बड़ी बातें
प्रधानमंत्री के संबोधन की बड़ी बातें
आज जीवन के हर क्षेत्र में हमारी माता-बहनें और बेटियां कमाल कर रही हैं। मैं अपील करता हूं कि इसे राजनीति के तराजू से मिल तोलिए। आज नारी शक्ति की भागीदारी को खुले मन से स्वीकार करने का मौका है। आज नारी शक्ति हमारे फैसले के साथ-साथ नीयत देखेगी। अगर हम 2029 में भी इसे लागू नहीं करते हैं, तो माता-बहनों का विश्वास टूट जाएगा। हमारा दायित्व है कि हम टुकड़ों में न सोचकर एक राष्ट्र के तौर पर सोचें।
विरोध
आज विरोध किया, तो लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी- प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज महिलाओं में राजनीतिक चेतना है। आज महिलाएं वोकल हैं। जो लाखों बहनें 25 साल पहले पंचायत में काम कर चुकी हैं, वे अब निर्णय प्रक्रिया में शामिल होना चाहती हैं। इसलिए, राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, उनको ये मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25-30 साल में लाखों बहनें लीडर बन चुकी हैं। इसलिए जो आज विरोध करेंगे, उनको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी।"
विधेयक
तीनों विधेयकों के बारे में जानिए
केंद्र सरकार जो 3 विधेयक लाई हैं, उसमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में लोकसभा की सीटें 850 करने का प्रस्ताव है, जिससे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता खुलेगा। परिसीमन (संशोधन) विधेयक में परिसीमन आयोग के गठन और नई जनगणना आधारित सीटों का बंटवारा करने का प्रावधान है। तीसरे विधेयक में केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन का प्रावधान है।