संसद में दो-तिहाई बहुमत से कितना दूर NDA, मानसून सत्र में पारित हो पाएगा परिसीमन विधेयक?
क्या है खबर?
केंद्र सरकार इसी साल अप्रैल में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक पारित नहीं करवा पाई थी। इन्हें पारित करवाने के लिए जरूरी दो-तिहाई समर्थन नहीं मिला था। हालांकि, इसके बाद से आम आदमी पार्टी, शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में टूट हुई है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का कुनबा बढ़ा है। सरकार अब इन विधेयकों को मानसून सत्र में पेश कर सकती है। आइए जानते हैं क्या अब सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत है।
लोकसभा
अभी कैसी है लोकसभा की स्थिति?
फिलहाल लोकसभा में 540 सांसद हैं। 3 सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 है। NDA के पास कुल 319 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 240 और बाकी सहयोगी पार्टियों के 79 हैं। ये संख्या शिवसेना और TMC के बागी सांसदों को मिलाकर है। अभी लोकसभा स्पीकर द्वारा इनके दल बदल पर फैसला लेना बाकी है। वर्तमान स्थिति के आधार पर NDA के दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी 41 सांसद कम हैं।
राज्यसभा
राज्यसभा का क्या हाल है?
245 सदस्यीय राज्यसभा में NDA के पास 141 सांसद हैं। बहुमत का आंकड़ा 164 है। अगर उसे 10 मनोनीत और निर्दलीय सांसदों का समर्थन मिल जाता है तो आंकड़ा 151 पहुंच जाएगा। हालांकि, बीजू जनता दल (BJD) और YSRCP ऐसी पार्टियां हैं, जो न NDA के साथ है न विपक्षी गठबंधन INDIA के साथ। इन दोनों ने पहले कई बार सरकार के प्रमुख विधायी एजेंडे का समर्थन किया है। अगर इनका समर्थन मिला तो संख्या 160 तक पहुंच सकती है।
टूट
अप्रैल से अब तक कैसे बढ़ा NDA का कुनबा?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में भगदड़ मची। उसके 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया और NDA को समर्थन देने का ऐलान किया। इसी तरह शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए। वहीं, राघव चड्ढा समेत AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है।
जानकारी
क्यों जरूरी है दो-तिहाई बहुमत?
दरअसल, संसद में आम विधेयक तो सामान्य बहुमत से पारित हो जाते हैं, लेकिन जिन विधेयकों के जरिए संविधान संशोधन किया जाता है, उन्हें पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक भी संविधान संशोधन विधेयक हैं।
रणनीति
क्या है भाजपा की रणनीति?
रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा की नजरें अब समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP शरद) पर है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद TVK का समर्थन करने की वजह से DMK ने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है। पार्टी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपने सांसदों के लिए कांग्रेस से अलग सीटें मांगी हैं। संभव है कि DMK के 22 सांसदों का समर्थन भी NDA को मिल जाए।
दूसरा तरीका
सदस्यों के अनुपस्थित रहने से भी बन सकता है NDA का खेल
दो-तिहाई बहुमत सदन में मौजूद सांसदों की संख्या से तय होता है। ऐसे में एक विकल्प ये भी है कि भाजपा विपक्षी सांसदों को संसद से अनुपस्थित रहने के लिए मना ले। ऐसा करने से संसद में प्रभावी सदस्य संख्या घट जाएगी और दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा भी कम हो जाएगा। SP, DMK, NCP (शरद) और TMC के कुल 75 सांसद हैं। 7 निर्दलीय और छोटी पार्टियों के भी 10 सांसदों पर भी निगाह है।
विधेयक
पिछली बार पारित नहीं हो सके थे विधेयक
अप्रैल में सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 3 विधेयक लेकर आई थी। इनमें से एक संविधान संशोधन विधेयक था, जिसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 सांसदों ने वोट किया। विधेयक को पारित होने के लिए जरूरी दो-तिहाई वोट नहीं मिले। इसके बाद सरकार ने बाकी दोनों विधेयकों को वापस ले लिया था। बीते 12 साल में ऐसा पहली बार हुआ था, जब सरकार किसी विधेयक को पारित नहीं करा पाई थी।