केंद्र सरकार ने FCRA विधेयक को JPC के पास भेजा, विपक्ष कर रहा था विरोध
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने लोकसभा में हंगामे के बीच विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (FCRA) विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया है। ध्वनि मत से विधेयक को JPC में भेजने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। इस विधेयक का विपक्ष विरोध कर रहा था। अब लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्यों वाली JPC विधेयक को लेकर अपनी सिफारिशें पेश करेंगी, जिसके बाद आगे चर्चा की जाएगी।
अखिलेश
अखिलेश यादव बोले- विपक्ष अल्पसंख्यकों के खिलाफ
विधेयक पर अखिलेश यादव ने कहा, "पूरा विपक्ष FCRA विधेयक के खिलाफ हैं। मैं माननीय मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं, हमें बताएं कि इस सरकार ने अब तक कौन सा विधेयक लाया है जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं था?"
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "मैं अखिलेश जी को चुनौती देता हूं कि वे हमें एक भी ऐसा बिंदु बताएं जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो। वे केवल सदन को गुमराह कर रहे हैं।"
विधेयक
क्या है FCRA विधेयक?
नए विधेयक में सरकार एक नामित प्राधिकरण को FCRA लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में विदेशी फंडिंग से बनी संपत्तियों की देखरेख या उनका निपटान करने की ताकत दे सकती है।
अगर संगठन निर्धारित अवधि के भीतर लाइसेंस नवीनीकृत करने में विफल रहता है, तो ये संपत्तियां स्थायी रूप से प्राधिकरण के पास चली जाएंगी।
विधेयक के मसौदे में अतिरिक्त रिपोर्टिंग का भी प्रस्ताव है, जिसमें परियोजनाओं का अधिक खुलासा और विदेशी योगदान का उपयोग शामिल है।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
FCRA के जरिए विदेशी फंडिंग का विनियमन होता है। इसे 1976 में लागू किया गया था।
इसके तहत सभी एसोसिएशन, समूह और NGO को विदेशी फंडिंग हासिल करने केे लिए इसके नियमों का पालन करना जरूरी है। FCRA तय करता है कि कौन-से NGO, ट्रस्ट और सामाजिक या धार्मिक संगठन विदेश से फंड ले सकते हैं और उसका इस्तेमाल कैसे करेंगे।
इसका मकसद विदेशी फंड के गलत इस्तेमाल को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा व सार्वजनिक हित की रक्षा करना है।