राहुल गांधी के खिलाफ सिखों से जुड़ी टिप्पणी पर नहीं होगी FIR, हाई कोर्ट का फैसला
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिखों से जुड़ी एक टिप्पणी पर गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने कहा कि राहुल ने भारत में सिखों के बीच असुरक्षा का माहौल बताया था, जिसमें सिर्फ एक समुदाय या समाज के एक हिस्से के बारे में चिंता जताई गई है। कोर्ट ने कहा कि राहुल को अल्पसंख्यकों की चिंता बताने का अधिकार है।
सुनवाई
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा, "राहुल गांधी प्रतिनिधि होने के नाते समाज के एक हिस्से के बारे में चिंताएं उठाने का अधिकार रखते हैं। इसके अलावा, चुने हुए जनप्रतिनिधि द्वारा अल्पसंख्यक के अधिकारों पर सवाल उठाना कोई अपराध नहीं हो सकता है। राहुल के उस भाषण को आर्टिकल-19 के तहत बोलने की आजादी के तहत सुरक्षा मिलेगी।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधि का विदेशी धरती पर चिंता जताना कुछ लोगों के लिए गलत हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं बनाता।
सुनवाई
जनप्रतिनिधि का मुख्य काम है चिंता उठाना- कोर्ट
कोर्ट ने आगे कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि का जनता की चिंताएं उठाना कोई वैकल्पिक शिष्टता नहीं है, बल्कि यह उसका मुख्य काम है।
पीठ ने कहा कि जब विधानसभा या पब्लिक फोरम में खुले तौर पर चिंताएं उठाई जाती हैं, तो वे पब्लिक रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती हैं, नागरिकों को जानकारी मिलती है और सरकारी कार्रवाई की जांच होती है।
कोर्ट ने आगे कहा, "इससे लोकतांत्रिक बातचीत जिदा और जीवंत रहती है।"
टिप्पणी
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
राहुल ने 9 सितंबर, 2024 को अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान एक सिख समुदाय को संबोधित करते हुए धार्मिक आजादी के बारे में यह कमेंट किया था।
राहुल ने कहा था, "लड़ाई इस बारे में है कि क्या उन्हें, एक सिख के तौर पर, भारत में पगड़ी पहनने, कड़ा पहनने की इजाजत मिलेगी, या गुरुद्वारे जा सकेंगे। यह सिर्फ उनके नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए हमारा मानना है कि हर राज्य, परंपरा और भाषा दूसरी जितनी जरूरी है।"
जानकारी
खारिज हो चुकी है याचिका
नागेश्वर मिश्रा ने वाराणसी में एक मजिस्ट्रेट के पास दंगे भड़काने का आरोप लगाते हुए राहुल के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी, जो पिछले साल खारिज हो गई। ACJM ने कहा कि सिर्फ शक के आधार पर FIR दर्ज नहीं हो सकती।