इको फ्रेंडली गणपति बाप्पा के नाम पर बेची जा रही नकली मूर्तियों को ऐसे पहचानें
क्या है खबर?
गणेश चतुर्थी के समय बाजार में इको फ्रेंडली गणपति की मूर्तियों की मांग बढ़ जाती है। पर्यावरण को बचाने के लिए मिट्टी से बनी मूर्तियों को खरीदने का चलन है। हालांकि, कई बार दुकानदार नकली इको फ्रेंडली मूर्तियां बेचते हैं, जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होती हैं। असली और नकली मूर्तियों की पहचान करना जरूरी है, ताकि सही मूर्ति खरीदी जा सके। आइए जानें ऐसी बातें, जो असली और नकली इको फ्रेंडली गणपति की पहचान करने में मदद करेंगी।
#1
मूर्ति के मटेरियल की जांच करें
इको फ्रेंडली मूर्तियां मिट्टी से बनाई जाती हैं, जो पानी में आसानी से घुल जाती हैं। नकली मूर्तियों में प्लास्टिक या कृत्रिम पदार्थों का इस्तेमाल होता है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।
मूर्ति खरीदते समय ध्यान दें कि वह मिट्टी से बनी हो। आप इसे छूकर या उसके वजन से भी पहचान सकते हैं।
मिट्टी की मूर्तियां हल्की होती हैं, जबकि प्लास्टिक या अन्य सामग्री से बनी मूर्तियां भारी होती हैं। ऐसे संकेत सही मूर्ति चुनने में मदद करेंगे।
#2
रंगों की गुणवत्ता पर ध्यान दें
इको फ्रेंडली मूर्तियों पर प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। नकली मूर्तियों पर चमकदार और रासायनिक रंगों का उपयोग होता है, जो पानी में घुलकर प्रदूषण फैलाते हैं।
मूर्ति खरीदते समय यह जरूर जांचें कि उस पर प्राकृतिक रंग लगाए गए हैं या नहीं। प्राकृतिक रंग हल्के और साधारण दिखाई देते हैं, जबकि रासायनिक रंग ज्यादा चमकदार होते हैं।
पर्यावरण को बचाने के लिए ऐसी मूर्ति चुनें, जो बिना किसी नुकसान के पानी में घुल सके।
#3
चमकदार पेंटिंग से बचें
असली इको फ्रेंडली मूर्तियों पर हल्की और साधारण पेंटिंग होती है। नकली मूर्तियों पर चमकदार और भारी पेंटिंग की जाती है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक होती है।
चमकदार पेंट में अक्सर रसायन होते हैं, जो पानी को दूषित करते हैं। मूर्ति खरीदते समय उसकी पेंटिंग का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करें।
अगर पेंटिंग बहुत ज्यादा चमकदार या भारी लगे तो उसे न खरीदें। हल्की और प्राकृतिक दिखने वाली पेंटिंग वाली मूर्ति ही सही विकल्प है।
#4
मूर्ति की बनावट का निरीक्षण करें
इको फ्रेंडली मूर्तियां हाथ से बनाई जाती हैं, जिनमें कारीगरी की सुंदरता होती है। नकली मूर्तियां मशीनों से बनाई जा सकती हैं।
असली मूर्तियां हल्की और साधारण होती हैं, जबकि नकली मूर्तियां भारी और ज्यादा चमकदार होती हैं। मूर्ति की बनावट को ध्यान से देखें।
अगर मूर्ति में कारीगरी का काम दिखे और उसकी बनावट साधारण हो तो वह असली हो सकती है। मशीन से बनी मूर्तियां अक्सर एक जैसी दिखती हैं और उनमें कारीगरी का अभाव होता है।