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भारत की 5 पारंपरिक टैटू कला, जिनके बारे में नहीं जानते होंगे आप
भारत की 5 पारंपरिक टैटू कला

भारत की 5 पारंपरिक टैटू कला, जिनके बारे में नहीं जानते होंगे आप

लेखन सयाली
Jan 23, 2026
12:31 pm

क्या है खबर?

भारत में टैटू कला सदियों से प्रचिलित रही है और यहां इसकी एक समृद्ध विरासत है। यह कला न केवल सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि संस्कृति और परंपरा को भी दर्शाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसके लिए अलग-अलग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। आज हम आपको भारत की 5 प्रमुख पारंपरिक टैटू कला के बारे में बताएंगे, जो आपके लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं। ये सभी इतनी खूबसूरत होती हैं कि आप भी इन्हें करवाना चाहेंगे।

#1

मेहंदी कला

मेहंदी कला भारत के हर त्योहार और शादी-ब्याह का अहम हिस्सा है। मेहंदी हिना पौधे की सूखी पत्तियों के पेस्ट से लगाई जाती है, जो सूखने के बाद गहरा रंग देती है। इसमें फूल, पत्तियों, मोर और बेलों जैसे कई खूबसूरत डिजाइन शामिल होते हैं। यह एक अस्थायी टैटू होता है, क्योंकि यह कुछ दिनों में अपने आप हट जाती है। आप मेहंदी को जितनी देर तक सूखने देंगी, वह उतनी ही ज्यादा रचेगी और लंबे समय तक टिकेगी।

#2

गोदना कला

गोदना कला राजस्थान की एक खास पारंपरिक टैटू तकनीक है। इसमें काले रंग का उपयोग करके जटिल डिजाइन बनाए जाते हैं। यह प्रक्रिया बहुत ही सावधानीपूर्वक की जाती है, क्योंकि इसमें त्वचा की ऊपरी परत पर गहरी रेखाएं खींची जाती हैं। इसमें एक छड़ी को ठोककर त्वचा पर टैटू बनाए जाते हैं, जो स्थायी होते हैं। गोदना कला के लिए काली स्याही या फिर स्थानीय पौधों के पेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

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#3

गुदना कला

ओडिशा की पारंपरिक टैटू तकनीक को गुदना कहते हैं, जिसे कई लोग खाड़ा नाम से भी जानते हैं। इसमें लकड़ी की छड़ियों का उपयोग करके त्वचा पर निशान बनाए जाते हैं। इस प्रक्रिया में छड़ियों को गर्म करके त्वचा पर दबाया जाता है, जिससे गहरे निशान पड़ते हैं। गुदना कला में विभिन्न देवी-देवताओं, जानवरों और प्राकृतिक तत्वों के चित्र बनाए जाते हैं। यह कला ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे बहुत ही सावधानीपूर्वक किया जाता है।

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#4

गोंदन कला

गोंदन कला को महाराष्ट्र की शान माना जाता है, जो यहां की पारंपरिक टैटू तकनीक है। इसमें हाथों, पैरों और पीठ पर जटिल डिजाइन बनाए जाते हैं। यह जनजातीय समुदायों की एक पुरानी प्रथा है, जिसमें टैटू को गहने, वैभव का प्रतीक या आध्यात्मिक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जाता था। इसमें फूल (खासकर तुलसी), सूरज, चांद, देवी-देवताओं और परिवार के प्रतीकों के टैटू शामिल होते हैं। यह कला महाराष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है।

#5

खोड़ा कला

खोड़ा कला उत्तर प्रदेश की एक अनोखी पारंपरिक टैटू तकनीक है। इसमें त्वचा पर हल्का दबाव डालकर निशान बनाए जाते हैं, जो स्थायी होते हैं। इस प्रक्रिया में काले रंग का उपयोग करके जटिल पैटर्न बनाए जाते हैं। इसे आम तौर पर महिलाएं ही करवाती हैं और यह महिलाओं द्वारा ही की भी जाती है। इसमें प्राकृतिक स्याही और बांस की टहनियों का इस्तेमाल करके पहचान, आध्यात्मिकता और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाया जाता है।

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