रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं ये 5 योगासन
क्या है खबर?
रोग प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर की सुरक्षा प्रणाली होती है, जो हमें संक्रमण और बीमारियों से बचाती है। सही खान-पान और जीवनशैली के साथ-साथ योग भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है। योग के कुछ आसनों का नियमित अभ्यास आपके शरीर को मजबूत बनाता है और तनाव को कम करता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी हैं। आइए आज हम आपको योगासनों के बारे में बताते हैं।
#1
सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार में 12 अलग-अलग योगासनों का समावेश होता है, जिनका अभ्यास सुबह के समय खाली पेट किया जाना चाहिए।
यह योगासन पूरे शरीर की कसरत है और इसे करने से शरीर में खून का बहाव बेहतर होता है और त्वचा को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है।
इसके अलावा यह योगासन मांसपेशियों में खिंचाव लाने और उन्हें मजबूत बनाने में भी मदद कर सकता है। यहां जानिए सूर्य नमस्कार के 12 आसनों का अभ्यास करने का तरीका।
#2
वीरभद्रासन
इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पैरों को फैलाकर खड़े हो जाएं और हाथों को कंधे की सीध में फैलाएं, फिर दाएं पैर को 90 डिग्री घुमाएं और शरीर को दाईं ओर घुमाकर गहरी सांस लेते हुए दाएं घुटने को 90 डिग्री तक मोड़ें।
अब धीरे-धीरे सिर को ऊपर उठाएं और आंखों का ध्यान बाएं हाथ की उंगलियों पर केंद्रित करें। कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं।
#3
बालासन
सबसे पहले जमीन पर वज्रासन की मुद्रा में बैठें और गहरी सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं, फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुककर माथे को जमीन से सटाएं।
इस अवस्था में दोनों हाथ सामने, माथा जमीन से टिका हुआ और छाती जांघों पर रहेगी। कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहकर सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
इसके बाद सांस लेते हुए धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं।
#4
वृक्षासन
वृक्षासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले जमीन पर सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं, फिर हाथों की मदद से बाएं पैर का तलवा दाएं जांघ पर टिकाएं।
इसके बाद बाएं हाथ को सिर के ऊपर ले जाते हुए पीठ के पीछे की ओर रखें और दाएं हाथ से दाएं पैर के घुटने, कूल्हे और कमर को पकड़ने की कोशिश करें।
कुछ देर इसी मुद्रा में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं और इसी प्रक्रिया को दोहराएं।
#5
अधोमुख श्वानासन
इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं, फिर सामने की तरफ झुकते हुए हाथों को जमीन पर रखें और गहरी सांस लेते हुए कमर को ऊपर उठाएं।
इस दौरान घुटनों को सीधा करके सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इस अवस्था में शरीर का पूरा भार हाथों और पैरों पर होना चाहिए और शरीर का आकार 'V' जैसा नजर आना चाहिए।
कुछ मिनट ऐसे रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य होएं।