रात के समय ज्यादातर लोग क्यों करते रहते हैं डूमस्क्रोलिंग? जानिए इसके पीछे की वजह
क्या है खबर?
डूमस्क्रोलिंग एक ऐसी आदत है, जिसमें लोग रात के समय सोशल मीडिया या खबरों की वेबसाइट्स पर नकारात्मक खबरें पढ़ते रहते हैं। यह आदत नींद पर बुरा असर डाल सकती है और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। मनोवैज्ञानिक शोधों के अनुसार, डूमस्क्रोलिंग का कारण नकारात्मक जानकारी का लगातार सामना करना और उससे उत्पन्न होने वाली चिंता हो सकती है। आइए जानते हैं कि डूमस्क्रोलिंग के पीछे क्या-क्या वजह हो सकती हैं।
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नकारात्मक जानकारी का लगातार सामना करना
डूमस्क्रोलिंग का एक बड़ा कारण नकारात्मक जानकारी का लगातार सामना करना है। जब लोग रात के समय नकारात्मक खबरें पढ़ते हैं तो उनकी चिंता बढ़ जाती है। यह चिंता दिन के समय भी जारी रहती है और व्यक्ति को चैन से सोने नहीं देती। मनोवैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि नकारात्मक जानकारी का लगातार सामना करने से व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है और उसकी नींद प्रभावित होती है।
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सोशल मीडिया का उपयोग
सोशल मीडिया का उपयोग आजकल बहुत आम हो गया है, लेकिन इसका गलत तरीके से उपयोग करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। रात के समय जब माहौल शांत होता है तब लोग सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहते हैं और वहां पर उन्हें कई ऐसी खबरें मिलती हैं, जो उनकी चिंता को बढ़ा सकती हैं। रात के वक्त लोग काम से छुटकारा पा चुके होते हैं, जिससे उन्हें डूमस्क्रोलिंग का समय भी मिल जाता है।
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चिंता और तनाव का बढ़ना
रात के समय चिंता और तनाव का स्तर भी बढ़ जाता है। जब लोग रात में देर तक जागते हैं तो कुछ न कुछ सोचते रहते हैं। ऐसे में वे डूमस्क्रोलिंग करने से उनकी चिंता और तनाव का स्तर कम करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, कई बार इसका उल्टा असर देखने को भी मिल सकता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य ज्यादा प्रभावित हो जाता है और कई बार पूरी रात नींद नहीं आती।
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अनिश्चितता का डर
डूमस्क्रोलिंग का एक और बड़ा कारण अनिश्चितता का डर हो सकता है। जब लोग किसी घटना या स्थिति के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते हैं तो वे उसे लेकर चिंतित रहते हैं। रात के समय जब उन्हें कोई ऐसी खबर मिलती है, जिसमें अनिश्चितता हो तो वे उसे बार-बार पढ़ते रहते हैं, ताकि उनकी चिंता कम हो सके। यह आदत उनकी नींद को प्रभावित करती है और उन्हें चैन से सोने नहीं देती।
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सकारात्मक जानकारी की कमी
डूमस्क्रोलिंग करते समय अक्सर सकारात्मक जानकारी नहीं मिलती, जिससे व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। अगर उन्हें कोई अच्छी खबर मिलती भी है तो वह जल्दी ही खत्म हो जाती है। इस कारण व्यक्ति बार-बार नकारात्मक खबरें पढ़ता रहता है। इस तरह डूमस्क्रोलिंग एक ऐसी आदत बन जाती है, जो व्यक्ति की मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है और उसकी नींद को भी खराब कर देती है।