कुछ लोग जागते समय नहीं कर पाते चीजों की कल्पना, सपनों में देखते हैं साफ तस्वीरें
क्या है खबर?
जब हम किसी चीज या व्यक्ति के बारे में सोचते हैं तो उसकी तस्वीर हमारे मन में बन जाती है। हम आसानी से बीते पलों को याद कर पाते हैं और दिमाग में चीजों की कल्पना कर पाते हैं। यह ज्यादातर लोगों को आम लगेगा, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह संभव नहीं। एक नए अध्ययन के मुताबिक, कुछ लोग जागते हुए चीजों की कल्पना नहीं कर पाते, लेकिन सपने में सभी चीजों की साफ मानसिक तस्वीरें बना लेते हैं।
अध्ययन
'अफैंटेशिया' से पीड़ित लोगों पर हुआ अध्ययन
अध्ययन को 'साइंटिफिक रिपोर्ट' नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया था। ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के 2 शोधकर्ता, डेरेक अर्नोल्ड और लॉरेन बोयर ने इसे पूरा किया।
उनके मुताबिक, अपनी मर्जी से चीजों की कल्पना न कर पाने की स्थिति को 'अफैंटेशिया' कहा जाता है। अध्ययन में ऐसे लोगों के सपनों की जांच की गई, जिन्हें यह स्थिति थी।
पाया गया कि जागते समय की कल्पना और सपनों के बीच का संबंध हर व्यक्ति में काफी अलग-अलग होता है।
जांच
इस तरह हुई जांच
दोनों शोधकर्ताओं को भी यह स्थिति थी, जिनमें से आर्नोल्ड केवल आवाजों की और बोयर केवल स्पर्श की संवेदनाओं की कल्पना कर सकते हैं। उन्होंने जर्मनी में बॉन विश्वविद्यालय के मर्लिन मोंजेल के साथ मिलकर अध्ययन पूरा किया।
शोधकर्ताओं ने 205 लोगों से मिली ऑनलाइन प्रश्नावली के जवाबों का विश्लेषण किया। दृश्य कल्पना को मापने वाले स्कोर के आधार पर, 84 प्रतिभागियों को 'दृश्य अफैंटेशिया' समूह में और 121 प्रतिभागियों को तुलना समूह में रखा गया।
सवाल
प्रतिभागियों से पूछे गए ये सवाल
प्रतिभागियों ने ऐसी स्थितियों पर विचार किया, जो मन में अलग-अलग तरह की संवेदनाएं जगा सकती हैं। उन्होंने अपने द्वारा महसूस की गई इन काल्पनिक संवेदनाओं को एक क्रम दिया और रोजमर्रा की आदतों से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके सपनों में अलग-अलग तरह की संवेदनाएं कितनी बार महसूस हुईं। उनसे आवाजों, गंध, स्वाद, स्पर्श और हलचल के अहसास के बारे में भी पूछा गया।
नतीजे
क्या रहे अध्ययन के नतीजे?
अफैंटैसिया वाले समूह में 46 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें अपने सपनों में हमेशा दृश्य अनुभव होते हैं। लगभग 8 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें कभी ऐसे अनुभव नहीं होते।
तुलना समूह में किसी ने भी इसका अनुभव नहीं किया। हालांकि, ये लोग जागते समय चीजों की कल्पना करने में सक्षम नहीं थे।
यह साफ नहीं है कि सोते समय कोई अनुभूति क्यों मिल सकती है, जबकि जागने पर अपनी इच्छा से उसकी कल्पना करना क्यों मुश्किल है।