पढ़ने-लिखने से मनोभ्रंश का खतरा हो जाता है कम, अध्ययन में हुआ खुलासा
क्या है खबर?
उम्र चाहे कोई भी हो, पढ़ना-लिखना हमेशा ही काम आता है। अब एक अध्ययन ने खुलासा किया है कि पढ़ने या लिखने वाले लोगों में मनोभ्रंश बीमारी का खतरा कम होता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें याददाश्त, सोचने और तर्क करने की क्षमता में कमी आ जाती है। हालांकि, अगर आप रोजाना कुछ पढ़ते हैं या कुछ लिखते हैं तो आपका दिमाग तेज हो सकता है और मनोभ्रंश जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
अध्ययन
क्या कहता है यह अध्ययन?
यह अध्ययन अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की मेडिकल पत्रिका न्यूरोलॉजी में प्रकाशित किया गया था। इसकी प्रमुख लेखिका एंड्रिया जम्मिट थीं, जो शिकागो कि रश यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में काम करती हैं। अध्ययन में पाया गया है कि पढ़ना, लिखना और नई भाषाएं सीखना मनोभ्रंश के खतरे को 40 प्रतिशत तक कम कर सकता है। ऐसी अन्य दिमाग तेज करने वाली गतिविधियां करने से अल्जाइमर रोग का खतरा घटता है, जो मनोभ्रंश का खतरनाक प्रकार है।
जांच
8 सालों तक हजारों लोगों की हुई थी जांच
अध्ययन की शुरुआत में शोधकर्ताओं ने मनोभ्रंश से पीड़ित न होने वाले 80 साल की औसत आयु वाले 1,939 लोगों की मदद ली। इन सभी प्रतिभागियों पर औसतन 8 साल तक अध्ययन किया गया और नजर रखी गई। शोधकर्ताओं ने उनके जीवन के 3 चरणों में उनके संज्ञानात्मक जुड़ाव का आकलन किया। इनमें प्रारंभिक संवर्धन (18 वर्ष से पहले), मध्य आयु संवर्धन (40 वर्ष की आयु में) और बाद के जीवन संवर्धन (80 वर्ष की आयु) शामिल थे।
गतिविधियां
अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों ने की ये संज्ञानात्मक गतिविधियां
अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों ने तीनों चरणों में संज्ञानात्मक गतिविधियों और सीखने के संसाधनों से जुड़े सर्वेक्षण पूरे किए। प्रारंभिक संवर्धन में किताबें पढ़ना, कहानियां सुनना, अखबारों और एटलस पढ़ना और 5 साल से ज्यादा समय तक विदेशी भाषा सीखना शामिल था। मध्य आयु में पत्रिका की सदस्यता लेना, पुस्तकालय जाना और संग्रहालय जाने जैसी गतिविधियां हुईं। आखरी चरण में पढ़ना, लिखना और खेल खेलना शामिल था, जो आसानी से की जा सकती थीं।
नतीजे
क्या रहे अध्ययन के नतीजे?
नतीजों से सामने आया कि अध्ययन के दौरान 551 प्रतिभागियों में अल्जाइमर रोग विकसित हुआ। वहीं, 719 लोगों को हल्का संज्ञानात्मक विकार (MCI) हो गया। जिन लोगों में संज्ञानात्मक संवर्धन का स्तर उच्चतम था, उनमें अल्जाइमर और MCI विकसित होने का जोखिम उन लोगों की तुलना में कम था, जिनमें यह स्तर सबसे कम था। आयु, लिंग और शिक्षा कारकों को ध्यान में रखने के बाद, लोगों में अल्जाइमर रोग का जोखिम 38 प्रतिशत कम हुआ था।
परिणाम
सामने आए ये आंकड़े
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन लोगों को जीवनभर उच्चतम स्तर का संवर्धन प्राप्त हुआ, उनमें अल्जाइमर रोग औसतन 94 साल की आयु में विकसित हुआ। जबकि, जिन लोगों को सबसे कम स्तर का संवर्धन प्राप्त हुआ, उनमें यह 88 साल में ही विकसित हो गया था। जिन लोगों को जीवनभर सबसे ज्यादा संवर्धन मिला, उनमें MCI विकसित होने की औसत आयु 85 साल थी। जबकि, सबसे कम संवर्धन वालों में यह आयु 78 साल थी।