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कुत्ते-बिल्लियों को प्यार-से सहलाने से तनाव होने की संभावना होती है कम, अध्ययन में हुआ खुलासा
कुत्ते-बिल्ली को छूने से आने वाले तनाव से होगा बचाव (तस्वीर: पिक्सेल)

कुत्ते-बिल्लियों को प्यार-से सहलाने से तनाव होने की संभावना होती है कम, अध्ययन में हुआ खुलासा

लेखन सयाली
Oct 26, 2026
01:16 pm

क्या है खबर?

जिनके घरों में भी कुत्ते या बिल्लियां पले होते हैं, वो उनके परिवार का अहम हिस्सा बन जाते हैं। इन पालतू जानवरों का प्यार हमारी हर चिंता दूर कर देता है और जीवन में खुशियां भर देता है। अब विज्ञान भी इस बात का समर्थन करता है। जी हां, एक नए अध्ययन से सामने आया है कि अपने कुत्तों या बिल्लियों को प्यार-से सहलाने से तनाव होने का खतरा कम हो जाता है।

अध्ययन

जानवरों का स्पर्श घटाता है तनाव

इस अध्ययन को ऑस्ट्रिया के इंसब्रुक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पूरा किया है। इसे 'बायोलॉजिकल साइकोलॉजी' नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

इससे पता चला कि जानवर अपने शारीरिक स्पर्श के जरिए भविष्य में तनाव होने की संभावना कम कर देते हैं। कॉफमैन नाम के वैज्ञानिक और उनकी टीम ने 34.1 साल की औसत उम्र वाली 51 महिलाएं और 13 पुरुषों पर उनके कुत्तों के साथ एक प्रयोग किया।

जांच

ऐसे किया गया परिक्षण

अध्ययन के दौरान कुत्तों के मालिकों पर ऐसे परीक्षण किए गए, जिनका उद्देश्य उनके तनाव के स्तर को बढ़ाना था। उनके तनाव के स्तर को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी (ECG) और इलेक्ट्रोएन्सेफालोग्राफी (EEG) के जरिए मापा गया था।

इन परीक्षणों में एक तय समय-सीमा के अंदर सामान्य सवालों के जवाब देना या गणित का एक ऐसा सवाल हल करना शामिल था, जिसमें उन्हें किसी दी गई संख्या से एक निश्चित अंतराल पर उल्टी गिनती करनी थी।

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नतीजे

क्या रहे अध्ययन के नतीजे?

इसके बाद प्रतिभागियों को 5 मिनट का समय दिया गया। इस दौरान, वे अपने कुत्ते को छू सकते थे और उसको सेहला सकते थे।

5 मिनट बाद प्रतिभागियों को तनाव परिक्षण के दूसरे दौर से गुजरना था। दोनों परीक्षणों ने प्रतिभागियों में जैविक तनाव के संकेत पैदा किए।

जिन प्रतिभागियों ने ब्रेक के दौरान अपने कुत्ते को सहलाया था, उनमें तनाव परीक्षण के दूसरे दौर में तनाव के कम लक्षण दिखाई दिए।

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निष्कर्ष

तनाव से बचने के लिए पालतू जानवरों का लें सहारा

अध्ययन के नतीजों से पता चलता है कि अपने पालतू जानवर को छूने से प्रतिभागियों को आगे होने वाले तनाव से कुछ राहत मिली।

दिलचस्प बात यह है कि अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों ने खुद जो तनाव महसूस किया, उसकी उनकी अपनी रेटिंग और शोधकर्ताओं द्वारा मापे गए शारीरिक बदलावों के बीच कोई मेल नहीं था।

इससे पता चलता है कि पालतू जानवरों के साथ रहने के कुछ प्रभाव ऐसे हो सकते हैं, जिनका हमें पता भी नहीं चलता।

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