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जापान की फूलों वाली पारंपरिक इकेबाना कला है काबिले तारीफ, जानिए इसके बारे में खास बातें
इकेबाना की कला करने का तरीका

जापान की फूलों वाली पारंपरिक इकेबाना कला है काबिले तारीफ, जानिए इसके बारे में खास बातें

लेखन सयाली
Mar 09, 2026
06:35 pm

क्या है खबर?

इकेबाना जापान की फूलों को सजाने की एक खास कला है। इसमें खूबसूरती, संतुलन और सादगी पर जोड़ दिया जाता है। पश्चिमी देशों में फूलों की सजावट अलग होती है, जहां ज्यादा फूल और रंग दिखते हैं। इकेबाना में डालियों की बनावट, हर चीज का संतुलन और उनकी आपसी जुगलबंदी ज्यादा मायने रखती है। हर सजावट में आपको प्रकृति और मौसम की झलक दिखेगी। इसमें कम से कम चीजों से भी बहुत सोच-समझकर कलाकारी की जाती है।

#1

इकेबाना के खास नियम

इकेबाना बनाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना पड़ता है। इसमें सब कुछ एक जैसा नहीं होता। जैसे प्रकृति में चीज़ें अलग-अलग बढ़ती हैं, वैसे ही इस कला में भी होता है। खाली जगह का इस्तेमाल भी इसमें बहुत खास है। डालियों की बनावट भी बहुत अहम होती है। उन्हें ऐसे लगाते हैं कि वे एक अच्छी-सी आकृति बनाएं और देखने वाले का ध्यान उन पर ही जाए। आखिर में, मौसम का ध्यान रखना होता है।

#2

सही चीजें चुनने के टिप्स

इकेबाना के लिए सही चीजें चुनना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप ताजा फूल, पेड़ों की डालियां, पत्तियां और घास भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ये सब चीजें एकदम ताजा और बढ़िया होनी चाहिए, ताकि इनकी कुदरती खूबसूरती दिख सके। आप जो चीजें चुनें, उनसे मौसम या आपके मन का भाव दिखना चाहिए। अलग-अलग तरह की चीजों से सजावट में गहराई आती है। हालांकि, एक बात का ध्यान रखना कि सब चीजें आपस में मेल खाएं।

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#3

फूलों को सजाने के तरीके

इकेबाना में फूलों को सुंदर और संतुलित बनाने के कुछ खास तरीके होते हैं। एक तरीका है '3 लाइन' वाला, जिसमें 3 मुख्य चीजों को अलग-अलग ऊंचाई पर रखते हैं। इससे देखने में यह और खूबसूरत लगता है और सभी चीजें आसानी से दिखाई दे जाती हैं। एक और तरीका 'खाली जगह' का सही इस्तेमाल करना है, जिसमें चीजों को एक साथ ठूसने के बजाय उनके बीच थोड़ी जगह छोड़ते हैं। इससे हर चीज अपनी जगह पर अलग दिखती है।

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#4

इकेबाना से मन को शांत करना

इकेबाना करते समय अपना पूरा ध्यान इस कला में ही लगाना होता है, क्योंकि इसे बनाते हुए हर छोटी बात पर ध्यान देना पड़ता है। मौसम के हिसाब से चीजें चुनने से लेकर उन्हें सजाने तक, हर कदम पर आपको पूरा ध्यान लगाना पड़ता है। यह ध्यान वाला अभ्यास सिर्फ आपकी कला को ही नहीं निखारता, बल्कि आपके मन को भी शांत करता है। आप कला के जरिए प्रकृति से जुड़ पाते हैं।

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