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बच्चों को कितनी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर की जरूरत होती है? जानें
बच्चों के लिए जरूरी प्रोटीन और फाइबर

बच्चों को कितनी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर की जरूरत होती है? जानें

लेखन सयाली
May 29, 2026
05:16 pm

क्या है खबर?

बच्चों के लिए प्रोटीन और फाइबर बहुत जरूरी होते हैं। ये पोषक तत्व उनके शारीरिक विकास और सेहत के लिए अहम हैं। प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर की मरम्मत में मदद करता है, जबकि फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है। इस लेख में हम जानेंगे कि बच्चों को कितनी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर की जरूरत होती है और इन्हें कैसे उनके खान-पान में शामिल किया जा सकता है।

#1

प्रोटीन की अहमियत

प्रोटीन बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर की मरम्मत में मदद करता है। बच्चों को रोजाना अपनी उम्र के हिसाब से प्रोटीन की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, एक से 3 साल के बच्चों को रोजाना लगभग 14 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है, जबकि 4-8 साल के बच्चों को 19 ग्राम प्रोटीन चाहिए होता है। प्रोटीन के अच्छे स्रोतों में दूध, दही, दाल और फल शामिल हैं।

#2

फाइबर का महत्व

फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है। यह बच्चों के पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे वे अस्वास्थ्यकर स्नैक्स से दूर रहते हैं। एक से 3 साल के बच्चों को रोजाना लगभग 19 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है, जबकि 4-8 साल के बच्चों को 25 ग्राम फाइबर चाहिए। फाइबर के अच्छे स्रोतों में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल हैं।

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#3

प्रोटीन और फाइबर के स्रोत

बच्चों को प्रोटीन और फाइबर देने के लिए उनके खाने में दालें, चना, छोले, राजमा, सोयाबीन, हरी सब्जियां, फल, दलिया, ब्राउन चावल और साबुत गेहूं की रोटी शामिल करें। इन खाद्य पदार्थों में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो बच्चों के लिए फायदेमंद होती है। इसके अलावा दूध, दही और पनीर भी अच्छे प्रोटीन स्रोत हैं। इन सभी खाद्य पदार्थों को मिलाकर एक संतुलित डाइट तैयार की जा सकती है, जो बच्चों के लिए बहुत लाभकारी है।

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#4

बच्चों की जरूरतें

बच्चों की प्रोटीन और फाइबर की जरूरतें उनकी उम्र, वजन और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करती हैं। इसलिए, माता-पिता को अपने बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को समझना जरूरी है, ताकि वे उन्हें सही मात्रा में पोषक तत्व दे सकें। इसके अलावा बच्चों की समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहना चाहिए, ताकि उनकी सेहत पर नजर रखी जा सके और किसी भी कमी को समय रहते पूरा किया जा सके।

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