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नवजात शिशु का स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए जरूरी हैं ये जांचें, समय पर करवा लें
नवजात शिशुओं के लिए जरूरी जांचें

नवजात शिशु का स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए जरूरी हैं ये जांचें, समय पर करवा लें

लेखन सयाली
Feb 09, 2026
12:37 pm

क्या है खबर?

नवजात शिशु का पहला साल बहुत अहम होता है, क्योंकि इस दौरान बच्चे का विकास तेजी से होता है। इस समय पर उनकी खास देखभाल करने की जरूरत होती है और कुछ जरूरी जांचें करवानी होती हैं। इन जांचों से माता-पिता को पता चलता है कि बच्चा सही तरीके से बढ़ रहा है या नहीं। आज हम आपको कुछ जरूरी जांचों के बारे में बताएंगे, जो बच्चा पैदा होने के एक साल के अंदर करवा लेनी चाहिए।

#1

जन्म के तुरंत बाद करवाएं ये जांचें

जन्म के तुरंत बाद बच्चों की देखभाल के लिहाज से कुछ जांचें होती हैं। इनमें से एक एपगार स्कोर जांच है, जो जन्म के 1 और 5 मिनट बाद की जाती है। इसके जरिए श्वास, हृदय गति, मांसपेशियों की टोन और त्वचा के रंग का आकलन किया जाता है। खून की जांच भी अहम होती है, जिससे पता चलता है कि बच्चे में खून की कमी तो नहीं है। इसके साथ कान और आखों की जांच भी होती है।

#2

एक महीने में करवाएं ये जांचें

बच्चे के सुनने की क्षमता का पता लगाने के लिए एक महीने में सुनने की जांच कराना जरूरी होता है। इससे पता चलता है कि बच्चा आवाजों को पहचान रहा है या नहीं। अगर किसी कारणवश बच्चे को सुनने में दिक्कत हो रही हो तो इस जांच से उसे समय रहते ठीक किया जा सकता है। इस दौरान आपको शिशु की गर्दन, आंख, दिल, फेफड़ों, पेट और सिर की भी जांच करवा लेनी चाहिए।

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#3

2 महीने में करवाएं टीकाकरण

2 महीने में बच्चे को पहला टीका लगाया जाता है, जिसमें BCG, हेपेटाइटिस-B और पोलियो के टीके शामिल होते हैं। ये टीके बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं और कई बीमारियों से बचाते हैं। इसके अलावा इस समय पर डॉक्टर बच्चे का वजन और ऊंचाई भी मापते हैं, ताकि उनके विकास का पता चल सके। ये परीक्षण उन स्थितियों की पहचान और प्रबंधन के लिए अहम हैं, जो जन्म के समय स्पष्ट नहीं होतीं।

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#4

4 महीने पर करवाएं शिशु विकास की जांच

4 महीने पर शिशु विकास की जांच कराना बहुत जरूरी होता है। इसमें डॉक्टर बच्चे की शारीरिक और मानसिक वृद्धि का आकलन करते हैं, ताकि यह पता चल सके कि बच्चा सही तरीके से बढ़ रहा है या नहीं। इस दौरान शिशुओं के मांसपेशियों की टोन, कूल्हे की स्थिरता और आंखों की गतिविधियों का मूल्यांकन भी किया जाता है। जरूरत पड़ने पर एनीमिया या रक्त संबंधी अन्य समस्याओं की जांच के लिए कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) परीक्षण किया जाता है।

#5

6 महीने पर करवाएं ये जांचें

6 महीने के बाद शिशुओं में CBC और उच्च-प्रदर्शन तरल क्रोमैटोग्राफी (HPLC) के माध्यम से हीमोग्लोबिनोपैथी का पता लगाना शामिल होता है। इसी दौरान सुनने की क्षमता की भी जांच होती है, ताकि सुनिश्चित हो सके कि बच्चा ठीक से सुन पा रहा है या नहीं। इसी समय बच्चों के शारीरिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास की भी जांच होती है। 6 से 12 महीने के बीच शिशुओं को जरूरी टीके भी लगाए जाते हैं।

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