रोजाना कॉफी या चाय पीने से मनोभ्रंश का खतरा होता है कम, अध्ययन में हुआ खुलासा
क्या है खबर?
दुनियाभर में कई लोग अपने दिन की शुरुआत एक कप चाय या कॉफी पी कर करते हैं। ये पेय केवल ऊर्जा ही नहीं देते, बल्कि दिमाग की एक बीमारी के इलाज में भी मदद कर सकते हैं। एक अध्ययन से खुलासा हुआ है कि रोजाना कॉफी या चाय पीने से डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश का खतरा कम हो सकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं और इस बीमारी के विषय में भी बात करते हैं।
अध्ययन
क्या कहता है अध्ययन?
इस अध्ययन को जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (JAMA) नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसे बोस्टन स्थित हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने पूरा किया है। इसका नेतृत्व डॉ डेनियल वांग ने किया था। अध्ययन से पता चला है कि रोजाना कैफीन युक्त कॉफी या चाय पीने से लंबे समय तक संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। इन्हें डाइट का हिस्सा बनाने से चीजों को याद रखने में आसानी होती है।
जांच
लाखों लोगों ने लिया था अध्ययन में भाग
यह अध्ययन दाई के स्वास्थ्य से जुड़ी जांच और हेल्थ प्रोफेशनल्स फॉलो-अप जांच के आंकड़ों पर आधारित था। इसमें करीब 1.30 लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था, जिनके आंकड़े 40 सालों तक इखट्टा किए गए थे। अध्ययन से सामने आया कि मध्य आयु वर्ग के कॉफी पीने वाले लोगों में मनोभ्रंश विकसित होने का जोखिम 18 प्रतिशत कम था। वहीं, चाय पीने वालों में यह खतरा 14 प्रतिशत कम था।
कारण
कैसे असरदार हैं ये पेय?
कैफीन युक्त कॉफी पीने वाले लोगों में कैफीन रहित कॉफी पीने वालों की तुलना में संज्ञानात्मक गिरावट में भी थोड़ी कमी देखी गई थी। कॉफी और चाय में कैफीन और पॉलीफेनॉल होते हैं। ये रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य में सुधार करके और सूजन व ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके मस्तिष्क की उम्र बढ़ने से बचाने में मदद करते हैं। इन पेय में मौजूद पदार्थ चयापचय स्वास्थ्य में सुधार करके भी दिमाग को स्वस्थ रख सकते हैं। कारण
भविष्य
आगे पड़ेगी और अध्ययन की जरूरत
शोधकर्ताओं ने कहा है कि अभी इस विषय में और अध्ययन करने की जरूरत पड़ेगी। इस बात की पुष्टि करने के लिए और शोध करना होगा कि ये दोनों पेय वास्तव में मस्तिष्क की रक्षा कर पाते हैं या नहीं। भारत में लगभग 88 लाख लोग वर्तमान में मनोभ्रंश से पीड़ित हैं। दुनियाभर में इसके करीब 5.5 to 5.7 करोड़ मरीज हैं। यह अध्ययन मनोभ्रंश के इन मरीजों के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।