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गुजरात और मध्य प्रदेश की शान है पिथौरा चित्रकला, जानिए इसकी कुछ खास बातें
पिथौरा चित्रकला की खास बातें

गुजरात और मध्य प्रदेश की शान है पिथौरा चित्रकला, जानिए इसकी कुछ खास बातें

लेखन सयाली
Mar 09, 2026
12:40 pm

क्या है खबर?

पिथौरा चित्रकला भारत के आदिवासी समाज की एक रंगीन और संस्कृति से जुड़ी कला है। यह मुख्य रूप से गुजरात और मध्य प्रदेश की भील, राठवा और भिलाला जनजातियों द्वारा की जाती है। इसे पुराने समय में दीवारों को सजाने के लिए किया जाता था। इसमें आदिवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी, उनके रीति-रिवाज और उनकी मान्यताएं दिखती हैं। ये चित्र सिर्फ सुंदर नहीं लगते, बल्कि इनका गहरा संस्कृति महत्व होता है।

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पिथौरा चित्रकला का सांस्कृतिक महत्व

पिथौरा चित्रकला आदिवासी संस्कृति में बहुत खास मानी जाती हैं। यह सिर्फ सजावट के लिए नहीं होती, बल्कि इसके जरिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी कहानियां और पुरानी परंपराएं आगे बढ़ती हैं। इन चित्रों में अक्सर देवी-देवता, जानवर और रोजाना की जिंदगी के नज़ारे दिखाई देते हैं। इस तरह ये अपने समाज के इतिहास और उसके मूल्यों को जीवित रखते हैं। ये उनकी पहचान का एक अहम हिस्सा हैं और उन्हें अपने व्यक्तित्व को व्यक्त करने का मौका देती हैं।

#2

पिथौरा चित्रकला में इस्तेमाल होने वाले रंग

पिथौरा कला को बनाने के लिए पारंपरिक तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। ये तरीके सैकड़ों सालों में बेहतर हुए हैं। कलाकार पौधों और पत्थरों से मिलने वाले कुदरती रंगों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे रंग एकदम चमकीले दिखते हैं। ये रंग बांस या घास के रेशों से बनी कूचियों से बहुत ध्यान से चित्रों में उकेरे जाते हैं। इसी कारण से हर चित्र अलग होता है, लेकिन उनमें पिथौरा कला का खास अंदाज बना रहता है।

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पिथौरा चित्रकला के आम विषय

पिथौरा चित्रकला में अक्सर खेती-बाड़ी के दृश्य, त्योहार, घोड़े या हाथी जैसे जानवर और पुरानी कहानियां देखने को मिलती हैं। हर विषय का आदिवासी जिंदगी में अपना मतलब होता है। ये दिखाते हैं कि इन जनजातियों के लोग प्रकृति और अपनी आस्था से कैसे जुड़े हैं। इन विषयों से हमें पता चलता है कि इन समाज के लोग अपने आस-पास की दुनिया के साथ कैसे घुलते-मिलते हैं। आपको ज्यादातर चित्रों में घोड़े देखने को मिल जाएंगे।

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पिथौरा चित्रकला का भविष्य

आज पिथौरा चित्रकला की इस पुरानी कला को बचाने के लिए कई कोशिशें हो रही हैं। इसके लिए कार्यशालाएं और प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं, ताकि लोग इस खास कला के बारे में जान सकें। कलाकार नई पीढ़ी को इस कला से जोड़ रहे हैं। उनका मकसद है कि इसकी पुरानी पहचान बनी रहे और नयापन भी जुड़े। वे इसे आज के लोगों के हिसाब से थोड़ा बदल भी रहे हैं, ताकि आज के दर्शक इसका महत्व समझ सकें।

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