भारत में प्रचलित है हड्डी की नक्काशी की कला, जानिए इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
क्या है खबर?
हड्डी की नक्काशी एक अनोखी और खूबसूरत कला है, जो भारत के अलग-अलग हिस्सों में प्रचिलित है। यह कला न केवल कारीगरों की मेहनत और लगन का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को भी दर्शाती है। हड्डी की नक्काशी के जरिए गहने, मूर्तियां और अन्य सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं। ये सभी बहुत ही आकर्षक होती हैं और घर की सजावट के काम आती हैं। इस लेख में हम इस कला से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें जानेंगे।
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हड्डी की नक्काशी का इतिहास
हड्डी की नक्काशी का इतिहास बहुत पुराना है। यह कला भारत में बहुत पहले से चली आ रही है और मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ में की जाती है। पहले इसे धार्मिक मूर्तियां और मंदिर बनाने के लिए उपयोग किया जाता था। हालांकि, समय के साथ यह कला आगे बढ़ी और अब इसका उपयोग कई सजावटी वस्तुओं में किया जाता है। इसे मुख्य रूप से भैंस और ऊंट की हड्डियों से किया जाता है।
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हड्डी की नक्काशी के औजार
हड्डी की नक्काशी करने के लिए खास तरह के औजारों की जरूरत होती है। इनमें छोटे-छोटे चाकू, छेद करने वाले उपकरण और कटर शामिल होते हैं। इन औजारों की मदद से कारीगर हड्डी पर बारीकी से काम करते हैं और उसे मनचाहा आकार देते हैं। इसके अलावा रंगीन धागे या पत्थरों का उपयोग करके हड्डी की नक्काशी वाले सामानों को और भी आकर्षक बनाया जाता है, जिससे उनकी सुंदरता बढ़ जाती है।
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हड्डी की नक्काशी करने की प्रक्रिया
हड्डी की नक्काशी करने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। सबसे पहले हड्डी को साफ किया जाता और सोडा वाले पानी में घंटों तक उबाला जाता है। चमकदार सफेद रंग बनाए रखने के लिए हड्डियों को हाइड्रोजन पेरोक्साइड में डुबोकर 6-7 घंटे तक धूप में रखा जाता है। इसके बाद औजारों की मदद से कारीगर इन हड्डियों को काटते हैं और इन पर नक्काशी करते हैं। इसके बाद वस्तु को पोलिश करके बेचा जाता है।
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भारत में हड्डी की नक्काशी करने वाले प्रमुख क्षेत्र
भारत में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक आदि जैसे राज्यों में हड्डी की नक्काशी होती है। राजस्थान में जोधपुर और जैसलमेर शहरों में यह कला बहुत प्रसिद्ध है। गुजरात में सूरत शहर में भी इसका अच्छा काम होता है। कर्नाटक राज्य में भी कई जगहों पर यह कला देखी जा सकती है, जहां कारीगर अपनी प्रतिभा दिखाते हैं। हालांकि, लखनऊ इस कला का हब कहलाता है, जहां यह सबसे ज्यादा होती है।