असम का पारंपरिक लोक नृत्य है बिहू, जानिए इसके बारे में कुछ खास बातें
क्या है खबर?
बिहू असम का एक प्रमुख त्योहार है, जो यहां का सबसे बड़ा कृषि पर्व होता है। यह त्योहार असम की संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा है। बिहू नाच इस पर्व का मुख्य आकर्षण रहता है। यह नाच असम की ग्रामीण जीवनशैली को दर्शाता है और इसमें पुरुष और महिलाएं, दोनों भाग लेते हैं। इस नाच में असम की खेती-बाड़ी, पशुपालन और त्योहारों से जुड़ी कहानियां प्रस्तुत की जाती हैं। आइए बिहू नाच से जुड़ी खास बातें जानते हैं।
प्रकार
बिहू नाच के प्रकार
बिहू नाच मुख्य रूप से 3 प्रकार का होता है, जिनमें रोंगाली, काती और भोगाली शामिल होते हैं। रोंगाली बिहू अप्रैल में किया जाता है और इसमें नए फसल की कटाई का जश्न मनाया जाता है। काती बिहू अक्टूबर में होता है और इसमें खेतों की सुरक्षा के लिए पूजा करते हुए नाचा जाता है। भोगाली बिहू जनवरी में किया जाता है, जिसमें फसल की कटाई का जश्न मनाया जाता है। इन तीनों बिहू डांस की तीव्रता अलग होती है।
वेशभूषा
बिहू नाच की वेशभूषा
बिहू नाच की वेशभूषा बहुत ही आकर्षक होती है। पुरुष कलाकार धोती और कुर्ता पहनते हैं, जबकि महिलाएं पारंपरिक मेशोराम पहनती हैं। मेशोराम एक प्रकार की साड़ी होती है, जिसमें पीले, लाल और हरे रंगों का उपयोग किया जाता है। इन कपड़ों में कढ़ाई की गई होती है, जो असम की संस्कृति को दर्शाती है। इसके अलावा गहनों का भी उपयोग किया जाता है, जो इस नाच को और भी सुंदर बनाते हैं।
चरण
बिहू नाच के चरण
बिहू नाच 4 हिस्सों में बांटा जाता है। पहले हिस्से में लोग अपनी खुशी और उत्साह व्यक्त करते हैं। दूसरे हिस्से में प्रेमियों के मिलन का जश्न मनाया जाता है। तीसरे हिस्से में विवाह समारोह का प्रदर्शन किया जाता है। चौथे हिस्से में बड़ों का सम्मान किया जाता है। इन चारों हिस्सों में अलग-अलग प्रकार के गाने और स्टेप शामिल होते हैं, जो असम की ग्रामीण जीवनशैली को दर्शाते हैं।
वाद्ययंत्र
बिहू नाच के वाद्ययंत्र
बिहू नाच में ढोल, तामक, बीन और गगन जैसे संगीत वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाता है। ये संगीत वाद्य यंत्र बिहू नाच को जीवंत बनाते हैं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। ढोल और तामक मुख्य रूप से ताल देने के लिए उपयोग होते हैं, जबकि बीन और गगन हवा से बजाए जाते हैं। इन संगीत वाद्य यंत्रों की धुन बिहू नाच को एक अनोखा अनुभव बना देती है।
महत्व
बिहू नाच का महत्व
बिहू नाच असम की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है। यह न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। हर साल हजारों लोग इस अनोखे अनुभव का आनंद लेने आते हैं। बिहू नाच असम की ग्रामीण जीवनशैली को दर्शाता है और इसमें भाग लेना एक अनोखा अनुभव होगा। इसे केवल एक लोक नृत्य की तरह नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर की तरह देखना चाहिए, जो सदियों से असम की शान है।