नेपाल के 5 पारंपरिक गहने, जो हर महिला की सुंदरता में लगा देते हैं चार चांद
क्या है खबर?
नेपाल की पारंपरिक गहनों की शैलियां बहुत सुंदर और आकर्षक होती हैं। ये गहने न केवल महिलाओं की सुंदरता को बढ़ाते हैं, बल्कि नेपाल की संस्कृति और परंपरा को भी दर्शाते हैं। नेपाल में कई तरह के गहने बनाए जाते हैं, जो सोने, चांदी और अन्य धातुओं से बने होते हैं। इन गहनों में कीमती पत्थरों का भी उपयोग किया जाता है। आइए नेपाल के 5 पारंपरिक गहनों के बारे में जानते हैं।
#1
तिलहरी
तिलहरी नेपाल का एक पारंपरिक हार है, जिसका खास सांस्कृतिक महत्व होता है। इसे खास तौर से विवाहित महिलाएं ही पहनती हैं, जो उनके शादीशुदा होने का प्रतीक होता है। इसमें सोने की एक बड़ी लटकन लगी होती है, जो हरे या लाल रंग के छोटे कांच के मोतियों की माला में लटकी होती है। इसे नेपाली महिलाएं तीज जैसे त्योहारों और अन्य खास मौकों पर ही पहनती हैं। यहां पोते और नौगेड़ी नाम के हार भी पहने जाते हैं।
#2
सिरबंदी
सिरबंदी नेपाल का एक पारंपरिक माथे का आभूषण है, जो सोने से बना होता है। इसे विशेष रूप से लिंबू और मगर समुदाय की महिलाएं पहनती हैं, जो सांस्कृतिक गौरव और सौभाग्य का प्रतीक होता है। इसे सोने से बनाकर इसमें रत्न जड़े जाते हैं और इसे अर्द्धचंद्र या फूल के आकार में तैयार किया जाता है। इसमें 2 चेन भी जुड़ी होती हैं, जो इसे मांगटीका और माथा पट्टी जैसा लुक देती हैं।
#3
नख ढुंगरी
नेपाल की महिलाएं नाक को सजाने के लिए नख ढुंगरी पहनती हैं, जो नथ होती है। यह सोने से बनती है और इसके बीच में एक लाल रंग का रत्न लगाया जाता है। यह विवाहित महिलाओं के लिए एक खास जेवर है, जो सांस्कृतिक विरासत, वैवाहिक सुख और समृद्धि का प्रतीक है। यह जेवर कई अलग-अलग डिजाइन में उपलब्ध रहता है और इसे खास मौकों पर ही पहना जाता है।
#4
यर्लिंग
यर्लिंग नेपाल की पारंपरिक कान की बालियां होती हैं, जिन्हें महिलाएं अपने कानों में पहनती हैं। यह सोने और चांदी, दोनों से बनी होती हैं और इनमें कीमती पत्थरों का भी उपयोग होता है। इन बालियों का डिजाइन बड़ा, गोल और थोड़ा शंख के आकार का है। इसमें बारीक कारीगरी की जाती है और इसे त्योहारों, शादियों और विशेष अवसरों पर पारंपरिक पोशाक की शोभा बढ़ाने के लिए पहना जाता है।
#5
बाला
नेपाल में चूड़ियां भी बहुत पसंद की जाती हैं और यहां के पारंपरिक कड़े को बाला कहते हैं। इन्हें सोने, चांदी और अन्य धातुओं से बनाया जाता है और इनमें कीमती पत्थरों का भी उपयोग किया जाता है। कई महिलाएं बाला को ड्रैगन के आकार का भी बनवाती हैं, जिनका अपना खास सांस्कृतिक महत्व होता है। इन्हें शादीशुदा महिलाएं रोज पहनती हैं, जो सुहाग की भी निशानी हो सकती हैं।