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महाराष्ट्र के ये 5 पारंपरिक डांस फॉर्म हैं बहुत ही प्रसिद्ध, जानिए इनकी खास बातें
महाराष्ट्र के पारंपरिक डांस फॉर्म

महाराष्ट्र के ये 5 पारंपरिक डांस फॉर्म हैं बहुत ही प्रसिद्ध, जानिए इनकी खास बातें

लेखन सयाली
Feb 06, 2026
01:32 pm

क्या है खबर?

महाराष्ट्र के लोग अपनी कलात्मक संस्कृति को बहुत महत्व देते हैं, जो यहां के डांस फॉर्म में झलकती है। यहां डांस न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाता है। यहां के पारंपरिक डांस फॉर्म में लोककला, संगीत और नाटक का अनोखा मेल मिलता है। आज के लेख में हम महाराष्ट्र के 5 पारंपरिक डांस फॉर्म के बारे में बात करेंगे और उनकी खास बातों पर भी चर्चा करेंगे।

#1

लावणी

लावणी महाराष्ट्र का सबसे मशहूर लोक नृत्य है, जिसे मुख्य रूप से महिलाएं करती हैं। यह डांस फॉर्म शादी, त्योहारों और अन्य उत्सवों में प्रस्तुत किया जाता है। लावणी में महिलाएं पारंपरिक महाराष्ट्रीयन साड़ी पहनती हैं और तेज संगीत पर नाचती हैं। इस नाच में गाने का भी अहम रोल होता है, जो प्रेम, विरह और सामाजिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। यह पेशवा काल यानि 18वीं-19वीं शताब्दी में सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रयुक्त होने वाला डांस है।

#2

तमाशा

तमाशा महाराष्ट्र का एक बेहद लोकप्रिय लोक नृत्य है, जिसकी शुरुआत 16वीं से 17वीं शताब्दी के बीच हुई थी। इस एक प्रदर्शन में आपको लावणी, संगीत, अभिनय और डांस का अनोखा मेल देखने को मिल जाएगा। इस डांस को करते समय पारंपरिक रूप से ढोलकी, तुनतुनी और मंजीरे बजाए जाते हैं। इसके 2 प्रकार होते हैं, जो ढोलकी भरी यानि नाटकीय और संगीत भरी यानि डांस पर केंद्रित है। इसे अक्सर गावों के चौराहों पर पेश किया जाता है।

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#3

लेजिम

लेजिम भी महाराष्ट्र का एक लोक नृत्य है, जिसे कुछ लोग लेजियम नाम से भी जानते हैं। इसका नाम एक खास वाद्य यंत्र पर रखा गया है, जिसे हाथ में पकड़कर ही यह डांस किया जाता है। लेजिम वाद्य यंत्र छोटा-सा होता है, जिस पर ढेर सारी झांझर लगी होती हैं। पारंपरिक लेजिम डांस में कम से कम 20 लोग शामिल होते हैं और इसे ज्यादातर महिलाएं प्रस्तुत करती हैं।

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#4

कला डांड्या

नवरात्री के दौरान महाराष्ट्र में खास डांस होता है, जिसे कला डांड्या कहते हैं। यह काफी हद तक डांडिया से मिलता-जुलता है, क्योंकि इसे भी डंडियों के जरिए किया जाता है। यह डांस ढोल और तबले की ताल पर किया जाता है, जिसके दौरान नृतक एक बड़ा घेरा बनाकर खड़े होते हैं। अब वे धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए नाचते हैं और अपनी डंडियों को भी आपस में लड़ाते हैं। इसे ठीक उसी तरह करते हैं, जैसे डांडिया खेला जाता है।

#5

वर्ली

आपने वर्ली कला के बारे में तो सुना होगा, लेकिन वर्ली नाम का एक डांस फॉर्म भी महाराष्ट्र में प्रचिलित है। इसे कई लोग तारपा नृत्य भी कहते हैं। इसे मुख्य रूप से पालघर, ठाणे और नासिक जिलों की वर्ली जनजाति के लोग करते हैं। इसे तारपा नाम के संगीत वाद्य यंत्र की धुन पर किया जाता है और नृतक घेरा बनाकर इसे प्रस्तुत करते हैं। इसके दौरान नर्तक एक-दूसरे की कमर में हाथ डालकर गोल-गोल घूमते हुए नाचते हैं।

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