शी जिनपिंग की मौजूदगी में प्रधानमंत्री ने दुर्लभ खनिजों को लेकर दी चेतावनी, क्या कहा?
क्या है खबर?
नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन का आज दूसरा दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने संबोधन में दुर्लभ खनिजों के हथियारीकरण को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियारीकरण साझा विकास में बाधाएं उत्पन्न कर सकता है। खास बात है कि इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद थे। बता दें कि चीन का दुनिया के दुर्लभ खनिजों पर लगभग एकाधिकार है।
बयान
प्रधानमंत्री बोले- दुर्लभ खनिजों पर एकाधिकार विकास को प्रभावित कर सकता है
प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि रणनीतिक संसाधनों और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल दबाव बनाने के औजार के रूप में करना साझा विकास को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों का शस्त्रीकरण साझा प्रगति में बाधा डाल सकता है। BRICS ने प्रौद्योगिकी को अपनाने में समावेशिता पर जोर दिया है। समूह के भीतर सहयोग सरकारों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें उद्यमी, किसान, शोधकर्ता, महिलाएं, युवा और आम नागरिक भी शामिल होने चाहिए।"
बड़ी बातें
प्रधानमंत्री के संबोधन की बड़ी बातें
दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है।
महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने दिखाया है कि आज दुनिया के देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। किसी एक जगह आने वाला संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक दक्षिण देशों का BRICS पर भरोसा बढ़ा है, क्योंकि यहां उनकी बात सुनी जाती है और उनके अनुभवों को महत्व दिया जाता है।
चीन
प्रधानमंत्री के बयान को चीन से क्यों जोड़ा जा रहा है?
चीन दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग करता है, जिनका इस्तेमाल सौर पैनलों से लेकर स्मार्टफोन तक हर चीज में होता है।
पिछले साल अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध के बीच चीन ने दुर्लभ धातुओं और उन्नत प्रौद्योगिकी विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण अन्य सामग्रियों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिए थे।
भारत के लिए भी ये खनिज अहम है, क्योंकि वह अपने विनिर्माण और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों का विस्तार करना चाहता है।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
दुर्लभ खनिज 17 तत्वों का एक समूह है, जिनकी रासायनिक विशेषताएं एक जैसी होती हैं। इन सभी में अद्वितीय चुंबकीय, प्रकाशीय और विद्युत-रासायनिक गुण होते हैं।
इन खनिजों के बिना आप लगभग सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बनाने की कल्पना भी नहीं कर सकते।
इनका इस्तेमाल लाउडस्पीकर, कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, इलेक्ट्रिक कार मोटर, स्मार्टफोन, चिप से लेकर लड़ाकू विमान और मिसाइल बनाने तक में होता है। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका भी इनका उत्पादन करते हैं, लेकिन बेहद कम।