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प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली के लिए क्या आफत बनेगी हेली गुब्बी ज्वालामुखी की राख?
इथियोपिया में फटे ज्वालामुखी की राख दिल्ली से होकर गुजरी है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली के लिए क्या आफत बनेगी हेली गुब्बी ज्वालामुखी की राख?

लेखन गजेंद्र
Nov 25, 2025
12:10 pm

क्या है खबर?

दिल्ली पहले से गंभीर वायु प्रदूषण से जूझ रही है, ऐसे में इथियोपिया में फटे हेली गुब्बी ज्वालामुखी की राख ने और डर पैदा कर दिया है। राख पूर्वी अफ्रीकी देश से चलकर दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई राज्यों तक पहुंच गई है। भारतीय एयरलांइस समेत मध्य-पूर्व आने-जाने वाली कई एयरलाइंस ने भी अपनी उड़ानें रद्द की हैं। राख से विमानों के इंजन पर भी फर्क पड़ सकता है। क्या राख दिल्ली का प्रदूषण और बढ़ाएगा? आइए, जानते हैं।

ज्वालामुखी

दिल्ली-NCR, पंजाब और उत्तर प्रदेश से होते हुए चीन जाएगी राख

राख पर नजर रख रहे स्काईमेट वेदर ने बताया कि दिल्ली-NCR समेत हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के इलाकों से राख गुजर रही है। यह सुरक्षित रूप से हिमालय की ओर बढ़ेगी, लेकिन राजस्थान के ऊपर राख के कुछ हिस्से देखे गए हैं। थोड़ी देर में यह उत्तरी भारत से होते हुए चीन की तरफ चली जाएगी। हालांकि, इसकी धूल कणों के नीचे आने की संभावना बहुत कम है।

घातक

कितना घातक होगा असर?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि यह पर्यावरण में 25,000-45,000 फीट की ऊंचाई पर है, जिससे राख गिरने की संभावना कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंचाई होने से सतह पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। घटना को लेकर लोगों में घबराहट है, लेकिन यह प्रदूषण के लिए सीधेतौर पर जिम्मेदार नहीं है। स्काईमेट के मुताबिक, हमेशा की तरह सिर्फ स्थानीय प्रदूषण और धुआं ही असर डालेगा।

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सिर्फ राख का इतना दिखेगा असर

स्काईमेट का कहना है कि इससे सतह पर किसी को कोई खतरा नहीं है, बस एक बात यह है कि जहां भी धूल मौजूद होगी, वहां हमें थोड़ा रंगीन सूर्यास्त और सूर्योदय देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, सतह से 40,000 फीट ऊपर सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) का एक छोटा सा निशान देखा गया है, जो फैल जाएगा। मैदानी इलाकों में धूल गिरने की संभावना कम है। विशेषज्ञों ने इसे औलोकिक घटना बताया है, जो आमतौर पर इलाके में नहीं दिखती।

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असर

उड़ानों पर पड़ा है असर

सतह से राख के 40,000 फीट ऊपर होने का असर भले नीचे के प्रदूषण पर न पड़े, लेकिन उड़ानों पर इसका असर दिख रहा है। राख गलियारे से गुजरने वाले मार्गों पर सोमवार से उड़ानें बाधित हैं। इंडिगो, अकासा एयर और KLM रॉयल डच एयरलाइंस ने कई उड़ान रद्द की है। एयर इंडिया ने 7 अंतरराष्ट्रीय और 4 घरेलू उड़ानें रद्द की हैं। एयर इंडिया ने ज्वालामुखी वाली जगहों से गुजरने के कारण इंजन की जांच शुरू की है।

ज्वालामुखी

10,000 साल बाद फटा है हेली गुब्बी ज्वालामुखी

इथियोपिया के अफार क्षेत्र में हेली गुब्बी ज्वालामुखी 10,000 साल बाद फटा है। यह क्षेत्र पृथ्वी के सबसे गर्म और सबसे दुर्गम क्षेत्रों में एक है। अत्यधिक सक्रिय एर्टा एले ज्वालामुखी से लगभग 15 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित हेली गुब्बी भूगर्भीय रूप से अज्ञात रहा है। यहां हाल में कोई विस्फोट नहीं हुआ था। इसकी राख 10 से 15 किलोमीटर ऊपर तक गई है। मिशिगन टेक के प्रोफेसर साइमन कार्न ने इसकी उपग्रह तस्वीरें साझा की हैं।

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