LOADING...
#NewsBytesExplainer: जन्मजात नागरिकता पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारतीयों के लिए कितना अहम?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता पर ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाया है

#NewsBytesExplainer: जन्मजात नागरिकता पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारतीयों के लिए कितना अहम?

लेखन आबिद खान
Jul 01, 2026
11:22 am

क्या है खबर?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वहां के सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका लगा है। कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के जन्मजात नागरिकता को खत्म करने वाले आदेश को रद्द कर दिया है। पीठ ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिकी संविधान अमेरिका में पैदा हुए लगभग सभी बच्चों को स्वतः ही जन्मसिद्ध नागरिकता की गारंटी देता है। आइए फैसले का भारतीयों पर असर समझते हैं।

नागरिकता

सबसे पहले जानिए अमेरिका में जन्मजात नागरिकता क्या होती है?

अमेरिका के संविधान में 9 जुलाई, 1868 को हुए 14वें संशोधन में नागरिकता खंड के पहले भाग में अमेरिकी क्षेत्र में जन्मे बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता की गारंटी दी गई थी। इसमें कहा गया है कि अमेरिका में जन्मे या वहां नागरिक बने सभी लोगों के बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार दिया जाएगा। हालांकि, विदेशी राजनयिकों, शत्रुतापूर्ण सैन्य सदस्यों और विदेशी सार्वजनिक जहाजों पर जन्मे बच्चों को इससे बाहर रखा गया है।

फैसला

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है?

कोर्ट ने कहा कि 14वां संशोधन जन्मजात नागरिकता को सीमित करने के ट्रंप के दृष्टिकोण का समर्थन नहीं करता। कोर्ट ने कहा, "अगर संसद का इरादा अमेरिकी नागरिकता को केवल उन लोगों के बच्चों तक सीमित करना था, जो अमेरिका में रहते हैं, तो नागरिकता खंड की संक्षिप्त भाषा में ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता है। अमेरिका में अवैध रूप से या अस्थायी रूप से मौजूद माता-पिता से पैदा हुए बच्चे 14वें संशोधन के तहत जन्म से ही नागरिक हैं।"

Advertisement

असहमति

फैसले पर असहमति जताने वाले जजों ने क्या कहा?

फैसले से असहमति जताने वाले जस्टिस सैमुअल एलिटो ने कहा, "कोर्ट के बहुमत ने इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक में गंभीर गलती की है। 14वें संशोधन का नागरिकता खंड केवल अमेरिका के प्रति निष्ठा की मांग करता है।" वहीं, जस्टिस थॉमस ने तर्क दिया कि 14वें संशोधन को अब राजनीतिक उपयोग के लिए दोबारा उपयोग किया जा रहा है जो मुक्त दासों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के अपने दुखद इतिहास से परे हैं।

Advertisement

भारतीय

भारतीयों के लिए कितना अहम है फैसला?

अमेरिका में अनुमानित 52 से 54 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। अगर ट्रंप के आदेश लागू किया जाता, तो ऐसे माता-पिता से जन्मे बच्चों को नागरिकता से वंचित कर दिया जाता जो न तो अमेरिकी नागरिक थे और न ही कानूनी स्थायी निवासी। इनमें वीजा पर रह रहे लोग भी शामिल थे, जिनमें बड़ा हिस्सा भारतीयों का है। अब अस्थायी वीजा या ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे भारतीय माता-पिता के बच्चे भी अमेरिकी नागरिक माने जाएंगे।

संख्या

कितने भारतीयों को मिली राहत?

भारतीय समुदाय अमेरिका में सबसे तेजी से बढ़ते अप्रवासी समूहों में से एक है। लाखों भारतीय पेशेवर H-1B वीजा, L-1 इंट्रा-कंपनी ट्रांसफर वीजा और F-1 वीजा पर अमेरिका में काम और पढ़ाई करते हैं। वहीं, 10 लाख से ज्यादा भारतीय रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची में बने हुए हैं। अमेरिका में लगभग 32 लाख पंजीकृत भारतीय अप्रवासी रहते हैं, जो देश में दूसरा सबसे बड़ा अप्रवासी समूह है। भारतीय अमेरिका में तीसरी सबसे बड़ी अवैध अप्रवासी आबादी भी हैं।

फायदा

फैसले से भारतीयों को क्या फायदा?

कोर्ट के फैसले से H-1B वीजा पर रहने वाले सभी भारतीयों के बच्चों को अमेरिकी नागरिकता सुनिश्चित हो गई है। भले ही इन्हें खुद नागरिकता के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़े। साथ ही, अस्थायी वीजा पर रहने वाले लोगों के अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को भी स्वतः ही नागरिकता और आजीवन रहने का अधिकार मिल जाएगा। यह फैसला अमेरिका में पैदा हुए किसी भी अवैध भारतीय प्रवासी के बच्चों को भी जन्मजात नागरिकता सुनिश्चित करेगा।

बयान

विशेषज्ञों ने जताई खुशी

भारतीय अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाली संस्था इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक चिनटेन पटेल ने IANS से कहा, "आज का फैसला इस बात की पुख्ता पुष्टि करता है कि अमेरिका में किसका स्थान है। ट्रंप के कार्यकारी आदेश से भारतीय और दक्षिण एशियाई अप्रवासी परिवार सबसे अधिक प्रभावित होने वाले लोगों में शामिल हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने उन परिवारों को देखा और कहा- आपके बच्चे अमेरिकी हैं। वे यहीं के हैं।"

Advertisement