LOADING...
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कश्मीर और हिमाचल के सेब उद्योग पर क्यों मंडरा रहा खतरा?
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से भारतीय सेब उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कश्मीर और हिमाचल के सेब उद्योग पर क्यों मंडरा रहा खतरा?

लेखन आबिद खान
Feb 11, 2026
04:52 pm

क्या है खबर?

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में सरकार ने आयातित सेबों पर टैरिफ में छूट की घोषणा की है। इसने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेब बागान मालिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। उनका मानना है कि अमेरिकी सेब पर टैरिफ घटने से वे आसानी से भारत में प्रवेश कर सकेंगे, जिसके चलते स्थानीय उत्पादों को बड़ा झटका लगा सकता है। स्थानीय सेब बागान मालिकों ने समझौते पर चिंता जताई है।

बयान

सोपोर फल मंडी अध्यक्ष बोले- स्थानीय अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सोपोर फल मंडी के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक ने कहा, "यह समझौता हमारे लिए बहुत बुरा होगा। हम अमेरिका के सेब किसानों से मुकाबला नहीं कर सकते। उन्हें सरकार से मदद मिलती है, अच्छी-खासी सब्सिडी और नगद भुगतान मिलते हैं, जबकि हमारे पास फसल बीमा तक नहीं है। सरकार अमेरिकन सेब पर टैक्स कैसे कम कर सकती है? इससे स्थानीय उद्योग और अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।"

विक्रेता

सेब उगाने वाले मुनीर बोले- हमारे लिए कोई नीति नहीं

सोपोर के रहने वाले मुनीब ने कहा, "मोदी सरकार भारतीय उद्योगों की मदद के लिए 'मेक इन इंडिया' और 'गो लोकल' पर जोर दे रही है, लेकिन जब सेब की बात आती है, तो ऐसी कोई नीति नहीं है। अमेरिकी सेब उत्पादक और भारतीय उत्पादक के बीच कोई तुलना नहीं है। अमेरिकी सरकार हर चरण में वहां किसानों का साथ देती है और यहां हमें सरकार से मूलभूत मदद भी नहीं मिलती।"

Advertisement

हिमाचल

हिमाचल के सेब बागान मालिक भी चिंतित

इस कदम से हिमाचल प्रदेश का करीब 5,500 करोड़ रुपये का सेब उद्योग भी चिंता में है। सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष महेंद्र वर्मा ने दैनिक भास्कर से कहा, "अमेरिकी सेब के भारतीय बाजारों में आने से हिमाचल का प्रीमियम क्वालिटी का सेब बुरी तरह पिट जाएगा। सेब बागवानों को अच्छे सेब के दाम नहीं मिल पाएंगे। इसका सबसे ज्यादा असर प्रिमियम और कोल्ड स्टोरेज में रखे हुए सेब पर पड़ेगी।"

Advertisement

समझौते

व्यापार समझौते में सेब को लेकर क्या फैसला हुआ है?

समझौते के तहत, अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क 50 से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है और न्यूनतम आयात मूल्य 80 रुपये प्रति किलो हो गया है। अनुमान है कि इसके बाद अमेरिकी सेब भारत में लगभग 100 रुपये प्रति किलो की दर से पहुंचेगा। इससे स्थानीय सेब को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के सेब पर भी आयात शुल्क 50 से घटाकर क्रमश: 25 और 20 प्रतिशत किया गया था।

उद्योग

कितना बड़ा है कश्मीर का सेब उद्योग?

सेब उद्योग जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। अकेले घाटी में देश के कुल सेब उत्पादन का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा पैदा होता है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि घाटी में करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा होते हैं और ये उद्योग करीब 10,000 करोड़ रुपये का है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 50 लाख लोग सीधे या किसी और तरह से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं।

सेब

कितना सेब आयात करता है भारत?

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत सेब का 7वां सबसे बड़ा उत्पादक है। देश में 20-21 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। भारत ने 2015 में अमेरिका से लगभग 1.05 लाख मीट्रिक टन सेब आयात किए, जो 2018 में बढ़कर 1.47 लाख टन हो गए। 2019 में भारत ने आयात शुल्क 50 से बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया, जिसके चलते 2022 में अमेरिकी सेब आयात 5,000 मीट्रिक टन और 2023 में 7,000 मीट्रिक टन गिर गया।

Advertisement