भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुआ FTA पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए क्यों है बड़ा झटका?
क्या है खबर?
भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ (EU) के बीच गत 27 जनवरी को हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश चिंतित कर दिया है। इस समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं को तो यूरोपीय बाजारों में व्यापक और शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश के कपड़ा निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार सिकुड़ जाएगा। दोनों देशों के लिए यूरोप उनका सबसे बड़ा बाजार है। आइए जानते हैं FTA पाकिस्तान और बांग्लादेश को कैसे प्रभावित करेगा।
व्यापार
पाकिस्तान और बांग्लादेश को यूरोपीय बाजार में मिल रही थी आसान पहुंच
पाकिस्तान और बांग्लादेश के निर्यातकों को दशकों से यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलती रही है। जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेस (GSP) और एवरीथिंग बट आर्म्स (EBA) जैसी योजनाओं ने यूरोप को पाकिस्तान का एशिया के बाहर दूसरा सबसे बड़ा और बांग्लादेश का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बनाया है। इन योजनाओं में दोनों देशों को उनकी विदेशी आय के बड़े स्रोत वस्त्र निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच का लाभ मिला है, लेकिन भारत-EU FTA से इस पर असर पड़ेगा।
संबंध
पाकिस्तान के EU के साथ कैसे हैं व्यापारिक संबंध?
EU-पाकिस्तान के व्यापारिक संबंध 2004 के सहयोग समझौते पर आधारित हैं। दोनों ने 2012 में EU-पाकिस्तान 5 वर्षीय सहभागिता योजना शुरू की थी। पाकिस्तान को 2014 से EU द्वारा GSP+ का दर्जा दिया गया है। मानवाधिकार और श्रम अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और सुशासन से संबंधित 27 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुसमर्थन और प्रभावी कार्यान्वयन के बदले में EU पाकिस्तान के लगभग 85 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क-मुक्त पहुंच की अनुमति देता है, जो पाकिस्तान के कुल निर्यात का 20 प्रतिशत है।
साझेदार
पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है EU
EU पाकिस्तान का दूसरा बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो 2024 में पाकिस्तान के कुल व्यापार का 12.4 प्रतिशत हिस्सा था, जबकि पाकिस्तान वस्तुओं के व्यापार में EU का 48वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। EU और पाकिस्तान के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 12 अरब यूरो (लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये) का था। पाकिस्तान के निर्यात में वस्त्र और परिधानों का वर्चस्व है, जो 2024 में 75.8 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं, पाकिस्तान रसायन, मशीनरी, उपकरण आयात करता है।
व्यापार
बांग्लादेश के EU के साथ कैसे हैं व्यापारिक संबंध?
बांग्लादेश को भी यूरोपीय बाजारों में तरजीही प्राप्त है। बांग्लादेश को 1975 से प्राप्त अल्प विकसित देश (LDC) का दर्जा उसे EBA व्यवस्था का लाभ उठाने की अनुमति देता है, जिसके तहत हथियारों और गोला-बारूद को छोड़कर सभी निर्यातों पर शुल्क-मुक्त और कोटा-मुक्त पहुंच प्राप्त है। बांग्लादेश EBA व्यवस्था के तहत सबसे बड़ा लाभार्थी है, जिसके 17.1 अरब यूरो (लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपये) के निर्यात को 2023 में इन वरीयताओं का लाभ मिला।
भागीदार
EU का 36वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था बांग्लादेश
साल 2024 में बांग्लादेश EU का 36वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था, जबकि EU बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। साल 2024 में EU और बांग्लादेश के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 22.2 अरब यूरो (लगभग 2.40 लाख करोड़ रुपये) था। बांग्लादेश से EU के आयात में वस्त्रों का वर्चस्व है, जो 2024 में बांग्लादेश से EU के कुल आयात का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा है। बांग्लादेश EU से मशीनरी, घरेलू उपकरण और रासायनिक उत्पाद आयात करता है।
संबंध
भारत के EU के साथ कैसे हैं व्यापारिक संबंध?
भारतीय निर्यातकों को पाकिस्तान और बांग्लादेश की तुलना में यूरोपीय बाजारों में तरजीही पहुंच का अभाव रहा है। 2026 से पहले EU में भारतीय सामानों पर मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) टैरिफ लागू होता था। MFN टैरिफ मानक, गैर-भेदभावपूर्ण शुल्क हैं जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देश एक-दूसरे पर लागू करते हैं। इसमें वस्त्रों पर लगभग 12 प्रतिशत और समुद्री खाद्य उत्पादों पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगता था। भारत-EU के बीच व्यापार में 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
व्यापार
भारत का 9वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है EU
भारत का EU 9वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है। दोनों के बीच 2024 में 120 अरब यूरो (लगभग 13.01 लाख करोड़ रुपये) का व्यापार हुआ, जो भारत के कुल व्यापार का 11.5 प्रतिशत है। भारत से EU के आयात में मुख्य रूप से मशीनरी और उपकरण, रसायन, आधार धातुएं, खनिज उत्पाद और वस्त्र शामिल हैं। इसी तरह भारत को EU के निर्यात में मशीनरी और उपकरण, परिवहन उपकरण और रसायन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
बढ़त
भारत को FTA से पाकिस्तान और बांग्लादेश पर कैसे मिलेगी बढ़त?
भारत-EU के बीच FTA पहले से मजबूत व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा। EU द्वारा 90 प्रतिशत टैरिफ समाप्त करने और मूल्य के हिसाब से 91 प्रतिशत तक की कटौती से बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। रॉयटर्स के अनुसार, EU के 250 अरब डॉलर (लगभग 22.50 लाख करोड़ रुपये) के परिधान बाजार में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल मात्र 3 प्रतिशत है, लेकिन FTA के बाद इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है। फिलहाल इस बाजार में चीन, बांग्लादेश और वियतनाम का दबदबा है।
जानकारी
भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद
उद्योग जगत और विश्लेषकों का मानना है कि FTA बाद भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात में सालाना 20-25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जिससे यह क्षेत्र 2030 तक 100 अरब डॉलर (लगभग 9 लाख करोड़ रुपये) के निर्यात लक्ष्य की ओर अग्रसर होगा।
घबराहट
भारत-EU के बीच FTA से क्यों घबराए पाकिस्तान और बांग्लादेश?
भारत-EU के बीच FTA से पाकिस्तानी और बांग्लादेशी निर्यातकों में गहरी चिंता है। उनका मानना है कि इससे आकर्षक यूरोपीय बाजार में मजबूत पकड़ अब खत्म हो जाएगी। बिजनेसमैन पैनल प्रोग्रेसिव (BMPP) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FPCCI) के उपाध्यक्ष साकिब फैयाज मैगून ने कहा, "भारत को FTA के तहत जिस दिन से शून्य-रेटेड प्रवेश मिलने लगेगा, उसी दिन से पाकिस्तान और बांग्लादेश का लाभ समाप्त हो जाएगा और निर्यातकों को भारी नुकसान होगा।"
असर
पाकिस्तान के लिए GSP पर रहना ही पर्याप्त नहीं- अरशद
होजरी मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रमुख फैसल अरशद ने कहा, "पाकिस्तान का केवल GSP प्लस पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। अनुपालन और लागत भार को मान्यता दिए बिना टैरिफ-मुक्त पहुंच से बाजार में असमानता पैदा होगी।" उन्होंने कहा, "बांग्लादेश की स्थिति ज्यादा खराब है। नवंबर 2025 में अल्प विकसित देश का दर्जा खोने के कारण वह 3 साल में यूरोप के परिधान बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच खो देगा। इससे यूरोपीय बाजार में बांग्लादेश का पारंपरिक प्रभुत्व खत्म होगा।"