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भारत और जापान के बीच हुआ समुद्री रक्षा समझौता कितना अहम? 
प्रधानमंत्री मोदी के साथ जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी

भारत और जापान के बीच हुआ समुद्री रक्षा समझौता कितना अहम? 

लेखन आबिद खान
Aug 21, 2026
02:28 pm

क्या है खबर?

भारत और जापान में हिंद-प्रशांत में शांति और स्थिरता के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच हुई बैठक में इस संबंध में समझौता किया गया। दोनों रक्षा मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता समुद्री सुरक्षा में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का ढांचा तैयार करता है।

बैठक

क्या है समझौता?

इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को ज्यादा व्यवस्थित, नियमित और अभियान की दृष्टि से उपयोगी बनाना है।

इसमें मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) के क्षेत्र में जानकारी साझा करने और साथ ही सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) और मानवीय सहायता व आपदा राहत (HADR) में सहयोग की व्यवस्था है।

यानी दोनों पक्ष समुद्री गतिविधियों के बारे में एक जैसी समझ विकसित करने और आपातकालीन स्थितियों व आपदाओं के दौरान मिलकर काम करने की बेहतर स्थिति में होंगे।

बड़ी बातें

समझौते की बड़ी बातें जानिए

दोनों देश समुद्री सुरक्षा और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक-दूसरे से रीयल-टाइम सूचना साझा करेंगे।

भारतीय नौसेना और जापान की मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स एक-दूसरे के बंदरगाहों, लॉजिस्टिक सपोर्ट और मरम्मत सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगी।

समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को बेअसर करने की तकनीक पर नौसेनाएं संयुक्त रूप से काम करेंगी।

समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ेगा।

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MDA

सुरक्षा के लिए MDA क्यों जरूरी?

MDA में समुद्र में होने वाली गतिविधियों की पूरी जानकारी इकट्ठा करना शामिल है। भारत और जापान अब अहम समुद्री रास्तों पर हो रही गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना करने में बेहतर तालमेल कर सकेंगे।

हिंद महासागर में भारत की स्थिति के लिहाज से ये जानकारी साझा करना अहम है। वहीं, जापान अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों पर बहुत ज्यादा निर्भर है।

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फायदा

भारत को क्या फायदा होगा?

समझौते के तहत 'सी लाइंस ऑफ कम्युनिकेशन' यानी समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा पर ध्यान देना है। ये रास्ते अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा प्रवाह और आपूर्ति के लिए अहम हैं।

दोनों पक्षों ने जहाज बनाने और उससे जुड़े क्षेत्रों में भारत की उत्पादन क्षमताओं के इस्तेमाल पर बातचीत को गहरा करने पर भी सहमति जताई है। इससे जापान के जहाज बनाने की उन्नत तकनीकों का फायदा भारत के 'मेक इन इंडिया' पहल का फायदा पहुंचाएंगा।

अन्य मुद्दे

इन क्षेत्रों में सहयोग पर भी बनी सहमति

दोनों देशों की नौसेनाओं ने जहाजों और बल की यात्राओं, संयुक्त अभ्यास, कर्मियों और विषय-विशेषज्ञों के आदान-प्रदान के जरिए तालमेल मजबूत करने पर सहमति जताई है।

दोनों देश समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने के क्षेत्र में भी सहयोग का विस्तार करेंगे।

साथ ही भविष्य के अभ्यासों को और जटिल बनाने, बिना पायलट वाले सिस्टम को शामिल करने और कम समय की सूचना पर संयुक्त अभ्यास करने पर सहमति जताई है।

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