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अमेरिका ने भारत को रूस से 30 दिन तक तेल खरीदने की छूट क्यों दी है?
अमेरिका ने भारत को रूस से 30 दिन तक कच्चा तेल खरीदने की छूट दी है

अमेरिका ने भारत को रूस से 30 दिन तक तेल खरीदने की छूट क्यों दी है?

Mar 06, 2026
05:35 pm

क्या है खबर?

अमेरिका ने भारत को 30 दिन तक रूस से तेल खरीदने की छूट दी है। यह घटनाक्रम ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध और तेल आपूर्ति में व्यवधान की चिंताओं के बीच सामने आया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा कर जहाजों पर हमले की चेतावनी भी दी है। ऐसे में आइए जानते हैं रूस से तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले अमेरिका ने अब भारत को छूट क्यों दी है।

छूट

अमेरिका ने भारत को क्या छूट दी है?

अमेरिका ने भारत से व्यापार समझौते की शर्तों के तहत 30 दिनों तक रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट दी है। यह कदम वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट द्वारा निर्धारित कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है। वर्तमान में तेल की कीमत 85.41 डॉलर (7,830.13 रुपये) प्रति बैरल है। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट तेल की कीमत में 8.51 प्रतिशत की बढ़तोरी के साथ 81.01 डॉलर (7,427.09 रुपये) प्रति बैरल तक पहुंच गई।

आयात

भारत ने पश्चिमी एशिया और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया

भारत ने अमेरिका और पश्चिम एशिया से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। नवंबर 2025 में अमेरिकी कच्चे तेल का आयात 27 लाख टन था, जो कुल आयात का 13.2 प्रतिशत है। भारत ने अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक अमेरिका से 11.6 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) मूल्य का कच्चा तेल आयात किया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 32 प्रतिशत अधिक है। यह दोनों देशों के सुधरते संबंधों का संकेत है।

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जानकारी

भारत के प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता देश

भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। भारत अपने कच्चे तेल का 40 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से आयात करता है। इसलिए होर्मुज का बंद होना भारत के लिए चिंता की बात है।

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छूट

अमेरिका ने क्यों दी भारत को छूट?

अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने लिखा, 'वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए वित्त विभाग भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है। यह जानबूझकर उठाया गया अल्पकालिक कदम रूसी सरकार को कोई खास वित्तीय लाभ नहीं देगा क्योंकि यह केवल समुद्र में फंसे तेल से जुड़े लेन-देन को ही अधिकृत करता है।' बता दें भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ताओं में से एक है।

आवश्यकता

भारत को प्रतिदिन कितने तेल की पड़ती है जरूरत?

आंकड़ों से पता चलता है कि भारत को घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिदिन लगभग 55 लाख बैरल तेल की आवश्यकता होती है और वह 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। साल 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले भारत अधिकांश तेल इराक (24 प्रतिशत), सऊदी अरब (16 प्रतिशत), UAE (10 प्रतिशत) और रूस (2 प्रतिशत) से खरीदता था। हालांकि, उसके बाद से भारत को तेल प्राप्त करने के स्रोतों में भारी बदलाव देखने को मिला है।

जानकारी

भारत के पास वर्तमान में कितना तेल भंडार है?

भारत के पास कच्चे तेल के साथ पेट्रोल-डीजल का लगभग 25 दिनों का भंडार है। रायस्टैड एनर्जी के एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख प्रतीक पांडे के अनुसार, भारत के पास 10 करोड़ बैरल कच्चे तेल का भंडार है, जो 45 दिन तक चल सकता है।

गिरावट

भारत के रूसी तेज के आयात में आई गिरावट

द हिंदू के अनुसार, भारत ने रूसी तेल का आयात कम करना शुरू कर दिया है। उसने जनवरी 2026 में रूस से 1.98 अरब डॉलर (181.51 अरब रुपये) का कच्चा तेल आयात किया, जो लगभग 4 वर्षों में सबसे कम है। जनवरी 2026 में भारतीय तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटकर 19.3 प्रतिशत रह गई, जो दिसंबर 2022 के बाद सबसे कम है। नवंबर में रूस की हिस्सेदारी 27.5 प्रतिशत और मई 2025 में 33 प्रतिशत थी।

अंतर

भारत में 3 साल के निचले स्तर पर आई रूसी तेज की आपूर्ति

विश्लेषण फर्म केप्लर के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत को रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति घटकर 12 लाख बैरल रोजाना के 3 साल के निचले स्तर पर आ गई। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला कि भारत का तेल बिल अक्टूबर 2024 में 5.8 अरब डॉलर (531.69 अरब रुपये) से घटकर अक्टूबर 2025 में 3.55 अरब डॉलर (325.43 अरब रुपये) हो गया। उसी महीने, रूस से भारत को तेल निर्यात 3 साल के निचले स्तर पर आ गया।

परिणाम

रूस से तेल न खरीदने पर क्या होंगे परिणाम?

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, रूस से तेल खरीद न बढ़ाने पर भारत का तेल बिल बढ़ जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से ऊंची कीमतें और देरी भारत के तेल बिल को (11.5 अरब डॉलर (1.054 लाख करोड़ रुपये) प्रति माह बढ़ा देंगी। कंपनी ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर (8,250.30 रुपये) प्रति बैरल से अधिक होने पर भारत का चालू खाता घाटा (CAD) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1.4 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

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