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#NewsBytesExplainer: वंदे मातरम के शुरुआती 2 छंद ही क्यों गाएगी कांग्रेस, क्या है विवाद?
कांग्रेस ने कहा है कि वो वंदे मातरम के शुरुआती 2 छंद ही गाएगी

#NewsBytesExplainer: वंदे मातरम के शुरुआती 2 छंद ही क्यों गाएगी कांग्रेस, क्या है विवाद?

लेखन आबिद खान
Aug 20, 2026
05:53 pm

क्या है खबर?

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर घमासान मचा हुआ है। एक तरफ कांग्रेस का कहना है कि वह इस गीत के सिर्फ पहले के 2 छंद ही गाएगी। भाजपा ने इस राष्ट्रीय गीत का अपमान बताया है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि वह 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) में लिए गए फैसले पर चल रही है, जिसे महात्मा गांधी समेत कई नेताओं ने माना था। आइए पूरा विवाद समझते हैं।

वंदे मातरम

सबसे पहले वंदे मातरम के बारे में जानिए

1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम की रचना थी। बाद में उन्होंने इसे अपने उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया था।

मूल रूप से यह गीत संस्कृत और बांग्ला के मिश्रण में लिखा गया है, जिसमें कुल 6 छंद हैं। पहले 2 छंदों में मातृभूमि की सुंदरता, नदियों और फसलों का जिक्र है। आखिरी के 4 छंदों में देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख है।

स्वदेशी आंदोलन के दौरान 'वंदे मातरम' एक प्रमुख नारा बनकर उभरा था।

फैसला

क्या है 1937 का कांग्रेस का फैसला?

1937 में CWC की वंदे मातरम पर बैठक हुई। इसमें महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे बड़े नेता शामिल हुए।

इसमें यह फैसला लिया गया कि राष्ट्रीय और सार्वजनिक सभाओं में वंदे मातरम् के केवल पहले के 2 छंद ही गाए जाएंगे।

इसी साल नेहरू ने बोस को एक पत्र लिखा था। उन्होंने आशंका जताई थी कि 'आनंदमठ' से जुड़े होने के कारण यह गाना मुसलमानों को भड़का सकता है।

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छंद

गीत के आखिरी 4 छंदों को लेकर क्या है विवाद?

गीत के आखिरी 4 छंदों में देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों का जिक्र है। इसमें भारत माता को एक देवी के रूप में दिखाया गया है। इस पर आपत्ति जताई गई है कि यह इस्लाम के सिर्फ एक ईश्वर को मानने के बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ है।

इन छंदों में मातृभूमि की रक्षा के लिए 'करोड़ों' हाथ होने, मातृभूमि की छवि धार्मिक स्थल में बसी होने और मातृभूमि की तुलना दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों से की गई हैं।

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विरोध

गीत को लेकर कब-क्या विवाद हुआ?

1923 में जब मोहम्मद अली जौहर कांग्रेस अध्यक्ष बने, तो वंदे मातरम गाए जाने के तुरंत बाद वे बैठक छोड़कर चले गए थे।

1930 और 1940 के दशक में मुस्लिम लीग ने विरोध जारी रखा। 1937 से पहले वंदे मातरम के सभी 6 छंद गाए जाते थे।

मुसलमानों द्वारा विरोध की एक और वजह ये थी कि 'आनंदमठ' में इस गीत का इस्तेमाल वहां किया गया था, जहां मुस्लिम जमींदारों के खिलाफ संन्यासी विद्रोह की बात की गई है।

नेता

गांधी, नेहरू समेत बड़े नेता कितने छंद गाते थे?

राज्यसभा के डेटा के मुताबिक, रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम गाया था। उनका सुझाव था कि गीत के सिर्फ पहले 2 छंद ही अपनाने चाहिए।

गांधी ने 1927 में धार्मिक आपत्तियों के कारण सिर्फ पहले 2 छंदों का समर्थन कि थे।

1937 में सरदार पटेल ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के उस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जिसमें सिर्फ पहले 2 छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाने की बात थी।

वर्तमान विवाद

अब ताजा विवाद क्या है?

19 अगस्त को CWC की बैठक में कांग्रेस ने 1937 के फैसले को दोहराते हुए कहा कि वो सिर्फ 2 छंद ही गाएगी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "मैंने वही वंदे मातरम गाया, जो गांधी, नेहरू, सरदार पटेल और वाजपेयी ने गाया था। अगर यह अपराध है, तो इन सभी के खिलाफ मामला दर्ज करें।"

भाजपा ने कहा कि यह वंदे मातरम का अपमान है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस की तुलना 'नई मुस्लिम लीग' से की।

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