LOADING...
#NewsBytesExplainer: पद्मा नदी पर बैराज क्यों बना रहा बांग्लादेश, फरक्का समझौते को लेकर क्या है विवाद?
पश्चिम बंगाल में स्थित फरक्का बैराज

#NewsBytesExplainer: पद्मा नदी पर बैराज क्यों बना रहा बांग्लादेश, फरक्का समझौते को लेकर क्या है विवाद?

लेखन आबिद खान
Jan 24, 2026
04:24 pm

क्या है खबर?

कुछ महीनों से तनावपूर्ण चल रहे भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं। अब बांग्लादेश ने गंगा नदी की धारा पद्मा नदी पर नया बैराज बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। बांग्लादेश जल विकास बोर्ड (BWDB) अब 50,443.64 करोड़ टका की लागत से इस परियोजना को लागू करने की तैयारी कर रहा है। भारत इस परियोजना पर बारीकी से नजर रखे हुए है। आइए जानते हैं पूरा विवाद क्या है।

परियोजना

परियोजना को लेकर बांग्लादेश ने क्या कदम उठाया है?

BWDB ने पद्मा बैराज परियोजना को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसकी अनुमानित लागत 50,443.64 करोड़ टका बताई गई है। बता दें कि गंगा नदी भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद पद्मा कहलाती है। बांग्लादेश इसी पर कुश्तिया जिले के पांग्शा क्षेत्र में बैराज बनाने की तैयारी कर रहा है, जो फरक्का बैराज से लगभग 180 किलोमीटर नीचे स्थित है। कई सालों से ये परियोजना लंबित है।

वजह

बांग्लादेश क्यों बनाना चाहता है बैराज?

बांग्लादेश का कहना है कि पद्मा बैराज से मानसून के दौरान पानी जमा किया जा सकेगा, जो सूखे मौसम में दक्षिण-पश्चिम व उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा। दस्तावेजों में कहा गया है कि इस परियोजना के जरिए 7-8 नदियों को पानी मिलेगा और सूखे मौसम में खराब हो चुकी जल प्रणालियां फिर से जीवित होंगी। बांग्लादेश के मुताबिक, गंगा नदी पर भारत द्वारा निर्मित फरक्का बैराज के कारण जल प्रवाह बाधित होने से बैराज बनाना जरूरी है।

Advertisement

फरक्का

क्या है फरक्का समझौता?

गंगा नदी के पानी के इस्तेमाल को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों तक विवाद था। इसे सुलझाने के लिए दिसंबर, 1996 में दोनों देशों ने फरक्का संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत हर साल 1 जनवरी से 31 मई के बीच गंगा के पानी का बंटवारा दोनों देशों के बीच तय नियमों के अनुसार होता है। यह संधि 30 सालों के लिए थी, जिसकी अवधि 2026 में खत्म हो रही है।

Advertisement

प्रावधान

संधि में क्या-क्या प्रावधान है?

समझौते के मुताबिक, जब फरक्का बैराज में 70,000 क्यूसेक से कम पानी होगा, तो भारत-बांग्लादेश दोनों बराबर पानी साझा करेंगे। जब पानी 70,000 से 75,000 क्यूसेक होगा तो भारत जल प्रवाह नियंत्रित करते हुए 35,000 क्यूसेक पानी बांग्लादेश को देगा। इसी तरह जब बैराज में पानी 75,000 क्यूसेक से ज्यादा होगा, तो भारत 40,000 क्यूसेक रखेगा और बाकी बांग्लादेश के हिस्से में जाएगा। इस संधि को इसी साल रिन्यू होना है, लेकिन तनाव के चलते बात आगे नहीं बढ़ी है।

फरक्का बैराज

फरक्का बैराज को लेकर क्या है विवाद?

फरक्का बैराज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा में गंगा नदी पर स्थित है। इसका मुख्य उद्देश्य गंगा के पानी को हुगली नदी प्रणाली में मोड़कर कोलकाता बंदरगाह की नौवहन क्षमता बनाए रखना है। बांग्लादेश का मानना है कि इसके चलते नदियों में पानी का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे पानी की कमी होती है और कृषि और मछली पालन प्रभावित होता है। हालांकि, भारत इन आरोपों को नकारता है।

विवाद

2024 में भी फरक्का बैराज को लेकर हुआ था विवाद

2024 में बांग्लादेश में लगातार बारिश और नदियों में आए उफान के कारण देश भर में बाढ़ आई थी और 11 जिले प्रभावित हुए थे। तब कई बांग्लादेश मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि भारत द्वारा फरक्का बैराज खोलने की वजह से बाढ़ आई थी। तब विदेश मंत्रालय ने कहा था, "हमने गलत वीडियो, अफवाहों और डर फैलाने की कोशिशें देखी हैं जिनका मकसद गलतफहमी पैदा करना है। तथ्यों के साथ इनका कड़ा खंडन किया जाना चाहिए।"

Advertisement