ईरानी जहाज को शरण देने पर बोले विदेश मंत्री- जो किया, सही किया
क्या है खबर?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज को डुबोने और एक अन्य ईरानी जहाज को भारत में शरण देने के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि ईरानी जहाज IRIS लावन को मानवीय आधार पर कोच्चि में डॉक करने की अनुमति दी गई थी। रायसीना डायलॉग में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करते हैं।
बयान
जयशंकर बोले- 28 फरवरी को जहाज ने मांगी थी अनुमति
जयशंकर ने कहा, "हमें ईरान से संदेश मिला कि एक जहाज, जो संभवतः हमारी सीमा के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह आना चाहता था। मुझे याद है यह 28 फरवरी की बात है और 1 मार्च को हमने कहा कि आप आ सकते हैं। उन्हें आने में कुछ दिन लगे और वे कोच्चि में डॉक हुए। जहाज अभी भी वहीं है। जहाज पर कई युवा कैडेट थे, वे उतर चुके हैं। वे पास के ही एक सुविधा केंद्र में हैं।"
जहाज
जयशंकर ने कहा- जहाज गलत जगह पर गलत समय में फंस गए
जयशंकर ने कहा, "जब वे रवाना हुए और यहां आए, तो स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे परिस्थितियों के गलत पक्ष में फंस गए। इसलिए, जब यह जहाज आना चाहता था और वह भी मुश्किलों में, तो मुझे लगता है कि यही मानवीय कार्य था। अन्य जहाजों की बात करें तो श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी और एक जहाज दुर्भाग्यवश नहीं आ सका। इसलिए हमने इसे मानवता के दृष्टिकोण से देखा, न कि कानूनी मुद्दों के संदर्भ में।"
हिंद महासागर
हिंद महासागर को लेकर क्या बोले विदेश मंत्री?
विदेश मंत्री ने कहा, "इस विषय पर सोशल मीडिया पर काफी बहस चल रही है। कृपया हिंद महासागर की वास्तविकता को समझें। इस क्षेत्र में विदेशी सैन्य उपस्थिति दशकों से बनी हुई है। डिएगो गार्सिया पिछले 5 दशकों से हिंद महासागर में सक्रिय हैं, जिबूती में विदेशी सेनाओं की मौजूदगी इस सदी के पहले दशक के शुरुआती दौर में हुई थी, हंबनटोटा का अस्तित्व इसी दौरान सामने आया।
सुरक्षा
जहाजों पर भारतीयों की सुरक्षा पर विदेश मंत्री ने क्या कहा?
जयशंकर ने कहा, "व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले लोगों में भारतीयों की संख्या बहुत अधिक है। जब भी मालवाहक जहाज पर हमला होता है, तो इसकी पूरी संभावना रहती है कि जहाज पर कुछ भारतीय कर्मचारी हों। हमें इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि पिछले कुछ दिनों में कई लोगों की जान गई है। व्यापारी नाविकों के हितों को मान्यता मिलनी चाहिए और हम उनकी सुरक्षा के लिए क्या कर सकते हैं, इस पर ध्यान देना चाहिए।"
मामला
क्या है ईरानी जहाजों से जुड़ा मामला?
दरअसल, ईरान के 3 जहाज- IRIS डेना, IRIS लावन और IRIS बुशहर एक सैन्य अभ्यास में शामिल होने भारत आए थे। यहां से लौटते वक्त IRIS डेना को श्रीलंका के नजदीक अमेरिका की पनडुब्बी ने डुबो दिया। इसमें जहाज में सवार 87 नौसैनिक मारे गए। वहीं, IRIS लावन को फिलहाल भारत ने कोच्चि में शरण दे रखी है। एक तीसरा जहाज IRIS बुशहर भी हालात को देखते हुए श्रीलंका के बंदरगाह पर है।