Loading...
चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 में क्या बदलाव किया था, जिस पर छिड़ा विवाद?
चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म 6 में बदलाव पर 2 आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी

चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 में क्या बदलाव किया था, जिस पर छिड़ा विवाद?

लेखन आबिद खान
Sep 25, 2026
06:02 pm

क्या है खबर?

चुनाव आयोग के कामकाज पर उठते सवालों के बीच फॉर्म 6 में हुए बदलाव भी चर्चा में हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में कहा है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इन बदलावों को 'अवैध' और 'अनाधिकृत' मानते हुए इन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की थी। इसके बावजूद जुलाई में आयोग ने फॉर्म 6 में बदलाव कर दिया। आइए जानते हैं पूरा विवाद क्या है।

फॉर्म 6

सबसे पहले फॉर्म 6 के बारे में जानिए

फॉर्म 6 वह वैधानिक फॉर्म है, जिसका इस्तेमाल 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं, नए भारतीय नागरिकों और ऐसे मतदाताओं द्वारा किया जाता है जिनका नाम मतदाता सूची से हट गया हो और वे दोबारा पंजीकरण कराना चाहते हों।

आसान भाषा में कहें तो अगर आपको अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करवाना है, तो फॉर्म 6 भरना जरूरी है।

इसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, आयु और पते का प्रमाण मांगा जाता है।

बदलाव

फॉर्म 6 में क्या बदलाव किए गए थे?

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, फॉर्म 6 में एक 'डिक्लेरेशन' सेक्शन जोड़ा गया है। यहां 3 विकल्प जोड़े गए हैं। इनमें से किसी एक विकल्प को चुनना जरूरी है।

यदि आवेदक पहले 2 विकल्पों में से किसी एक को चुनता था तो उसे विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और मतदाता सूची में संबंधित क्रम संख्या जैसी जानकारी देनी होती थी।

खास बात यह है कि इस सवाल को 'गैर-अनिवार्य' बताया गया है, लेकिन इसका जवाब दिए बिना फॉर्म आगे नहीं बढ़ता।

ADVERTISEMENT

सवाल

आवेदकों से कौन-कौनसे सवाल पूछे गए?

पहला सवाल- क्या 2000 के दशक की शुरुआत में हुए SIR के दौरान मतदाता सूची में उनका नाम था?

दूसरा सवाल- क्या उस सूची में उनके माता-पिता या दादा-दादी या नाना-नानी का नाम था?

तीसरा सवाल- क्या उस सूची में न तो उनका नाम था और न ही उनके परिजनों का?

रिपोर्ट के मुताबिक, ये बदलाव केवल ऑनलाइन फॉर्म में हुआ है और उन्हीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिखाई दे रहा है, जहां SIR हो चुका है।

ADVERTISEMENT

आपत्ति

दोनों चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति

इन बदलावों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। दोनों का तर्क था कि चूंकि फॉर्म 6 मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 का हिस्सा है, इसलिए इसे केवल एक औपचारिक सरकारी अधिसूचना और नियमों में संशोधन के माध्यम से ही बदला जा सकता है, न कि केवल ऑनलाइन फॉर्म को संपादित कर।

जोशी ने सुझाव दिया था कि प्रस्तावित बदलावों को केंद्र सरकार के पास भेजा जाए और नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अपनाई जाए।

तरीका

क्या है फॉर्म में बदलाव का कानूनी तरीका?

रिपोर्ट के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 28 के तहत इन नियमों को अधिसूचित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, केवल चुनाव आयोग के पास नहीं।

यानी फॉर्म 6 में वैधानिक बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

2021 में ऐसा ही मामला सामने आया था, जब संसद ने मतदाताओं से आधार नंबर लेने की अनुमति देने के लिए कानून में बदलाव किया था। तब बकायदा अधिसूचना जारी कर ऐसा हुआ था।

ADVERTISEMENT