महाराष्ट्र-दिल्ली समेत 5 राज्यों में SIR: कौनसे दस्तावेज जरूरी? यहां जानें हर एक सवाल का जवाब
क्या है खबर?
चुनाव आयोग आज से महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, झारखंड और मेघालय में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम शुरू कर रहा है। इस प्रक्रिया में बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता सूची सटीक और गलतियों से मुक्त हों। अगर आपके मन में भी प्रक्रिया को लेकर सवाल हैं, तो आइए हम इन सवालों का जवाब देने की कोशिश करते हैं।
SIR
सबसे पहले जानिए SIR क्या है?
SIR चुनाव आयोग द्वारा घर-घर जाकर मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चलाया जाने वाला एक व्यापक सत्यापन अभियान है। इसका उद्देश्य सभी पात्र मतदाताओं को शामिल करना, डुप्लिकेट नामों को हटाना, मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना, मतदाता विवरण में त्रुटियों को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम ही मतदाता सूची में हो। आयोग समय-समय पर ये काम करता रहता है।
समयसीमा
SIR से जुड़ी अहम तारीखें
30 जून से 29 जुलाई तक: BLO द्वारा घर-घर जाकर प्री-प्रिंटेड एन्यूमरेशन फॉर्म बांटने और सत्यापन का काम। 5 अगस्त: प्रारंभिक/प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन। 5 अगस्त से 4 सितंबर: दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की अवधि। 3 अक्टूबर: सभी प्राप्त दावों और आपत्तियों का अंतिम निपटारा। 7 अक्टूबर: अंतिम मतदाता सूची का आधिकारिक प्रकाशन। जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया हो रही है, वहां कुल 19.79 करोड़ मतदाता हैं।
शुरुआत
आपके घर पर कौन आएगा?
आपके घर पर सबसे पहले BLO आएंगे। वे आपको 2 कॉपी में पहले से भरा हुआ एन्युमरेशन फॉर्म देंगे। इसपर आपकी मौजूदा मतदाता जानकरी, फोटो, QR कोड और BLO का नाम और मोबाइल नंबर छपा होगा। आपको फॉर्म पर दी गई जानकारी की जांच करनी है। अगर कुछ जानकारी गलत है, तो वो बतानी है। फॉर्म पर हस्ताक्षर के बाद एक कॉपी BLO को देनी है और दूसरी खुद के पास रखनी है।
घर
BLO को आप घर पर नहीं मिले तो क्या होगा?
अगर आपका घर बंद है, तो BLO फॉर्म आपके दरवाजे पर छोड़ देगा। इसके बाद वह कम से कम 3 बार फॉर्म लेने के लिए वापस आएगा। आप यह प्रक्रिया ऑनलाइन भी पूरी कर सकते हैं या अपने बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। अगर तीनों बार आपका घर बंद मिला, तो आप मसौदा मतदाता सूची जारी होने के बाद अपनी जानकारी ठीक करवा सकते हैं या नया नाम जुड़वा सकते हैं।
ऑनलाइन फॉर्म
कैसे भर सकते हैं ऑनलाइन फॉर्म?
एन्यूमरेशन फॉर्म चुनाव आयोग के वोटर पोर्टल पर ऑनलाइन भी भरा जा सकता है। इसके लिए मतदाताओं को पिछली SIR से जुड़ी जानकारी देनी होगी। आप पुरानी मतदाता सूची से जानकारी पता करने के लिए EPIC (वोटर ID) नंबर, अपना नाम या अपने पोलिंग स्टेशन से जानकारी हासिल कर सकते हैं। दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र के लिए 2002 की, जबकि झारखंड के लिए 2003 और मेघालय के लिए 2005 की सूची मान्य होगी।
पुरानी जानकारी
पुरानी जानकारी नहीं मिलने पर क्या करें?
अगर आपका नाम 2002 की सूची में नहीं है या जन्म 1987 के बाद हुआ है, तो आपको अपने माता-पिता या दादा-दादी का नाम देना होगा जो उस सूची में थे। अगर आपकी शादी हो चुकी है और पिछली SIR में आपका नाम नहीं था, तो आपको ससुराल वालों की बजाय अपने माता-पिता या पैतृक परिवार की जानकारी देनी है। अगर आपके माता-पिता का भी नाम सूची में नहीं है, तो भी आप उनका नाम फॉर्म में दे सकते हैं।
दस्तावेज
सबसे जरूरी बात, किन दस्तावेजों की पड़ सकती है जरूरत?
अगर आपका या आपके माता-पिता का नाम पिछली मतदाता सूची में नहीं है, तो आपको दस्तावेज देने होंगे। जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, कक्षा 10वीं या कोई अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी का पहचान पत्र, पेंशन कार्ड, राज्य सरकार या स्थानीय निकाय द्वारा जारी पारिवारिक रजिस्टर भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का प्रमाण और आधार कार्ड मान्य होगा।
किराएदार
किराए के मकान में रहने वालों के लिए क्या अलग प्रक्रिया है?
अगर किरायेदार लंबे समय से उसी पते पर रहते हैं तो वे भी नामांकन के पात्र हैं। BLO आपके निवास की पुष्टि कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पते का प्रमाण मांग सकता है। अगर आप अपार्टमेंट या सोसायटी में रहते हैं, तो भी BLO आपके घर का दौरा करेगा। परिवार का एक सदस्य घर के अन्य सदस्यों के फॉर्म भी जमा कर सकता है, लेकिन ये सही ढंग से भरा और हस्ताक्षर किया हुआ हो।