#NewsBytesExplainer: क्या है सियांग अपर परियोजना, जिसका अरुणाचल प्रदेश में हो रहा विरोध?
क्या है खबर?
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के विरोध में हिंसा भड़क गई है। स्थानीय निवासियों और जनजातीय संगठनों ने बीती रात पासीघाट और आसपास के इलाकों में NHPC के दफ्तर, पुलिस स्टेशन और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। विधायकों के घरों पर भी पथराव हुआ और DSP समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। आइए समझते हैं परियोजना को लेकर क्या विवाद है।
परियोजना
क्या है SUMP?
SUMP एक बड़ी जलविद्युत और जल-भंडारण बांध परियोजना है। यह अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग और सियांग जिलों में सियांग नदी पर स्थित है।
परियोजना के तहत सियांग नदी पर 11,200 मेगावाट क्षमता का बांध बनाया जाना है।
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) और अरुणाचल प्रदेश सरकार इस परियोजना पर काम कर रही है। ये परियोजना करीब 2 दशक पुरानी है, लेकिन हाल के सालों में इसे गति मिली है।
नदी
अब सियांग नदी के बारे में जानिए
सियांग नदी चीन के तिब्बती पठार से निकलती है। तिब्बत में इसे 'यारलुंग त्सांगपो' कहा जाता है।
ये अरुणाचल प्रदेश के रास्ते भारत में आती है, जहां इसे 'सियांग' नाम से जाना जाता है।
बाद में यह लोहित और दिबांग नदियों के साथ मिलकर ब्रह्मपुत्र नदी बन जाती है, जो असम से होकर बहती है।
आगे चलकर यह बांग्लादेश में 'जमुना' के रूप में बहती हुई आखिर में बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
उद्देश्य
क्या है परियोजना का उद्देश्य?
यह परियोजना 11,000 मेगावाट से अधिक स्वच्छ और नवीकरणीय जलविद्युत पैदा करेगी।
असम और ब्रह्मपुत्र नदी के निचले इलाकों में बाढ़ को नियंत्रित करेगी।
बड़ी मात्रा में पानी का भंडारण होगा।
चीन द्वारा ऊपरी इलाकों से अचानक पानी छोड़े जाने की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी।
पूर्वी हिमालय में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगी।
क्षेत्रीय विकास में सहायक होगी और राज्य में रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
चरण
परियोजना को लेकर फिलहाल क्या हो रहा है?
यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं में से एक होगी। इसका काम 2028 में शुरू होने और 2032 तक पूरा होने की उम्मीद है।
फिलहाल यह परियोजना 'प्री-फिजिबिलिटी' और सर्वे के चरण में है।
अप्रैल 2022 में जल शक्ति मंत्रालय ने NHPC को परियोजना की शुरुआती व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था। 2025 में तकनीकी सर्वे शुरू किए गए थे। तभी से परियोजना का विरोध भी बढ़ा है।
चीन
परियोजना को चीन से क्यों जोड़ा जा रहा है?
दरअसल, चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर मेडोग बांध बना रहा है। यही नदी अरुणाचल में 'सियांग' नाम से बहती है और आगे असम में 'ब्रह्मपुत्र' नदी का रूप ले लेती है।
भारत का मानना है कि अगर चीन पानी के प्राकृतिक प्रवाह को रोकता है या अचानक छोड़ता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों में तबाही आ सकती है।
इस बांध के जरिए भारत पानी के भंडारण और नियंत्रण को अपने हाथ में रखना चाहता है।
विरोध
स्थानीय लोग क्यों कर रहे हैं विरोध?
स्थानीय लोगों खासकर जनजातीय समुदायों का कहना है कि परियोजना से ऊपरी सियांग जिले के मुख्यालय यांगयोंग समेत कई पारंपरिक गांव और पुश्तैनी जमीनें पूरी तरह जलमग्न हो सकती हैं, जिससे हजारों लोग बेघर हो जाएंगे।
यह क्षेत्र अत्यधिक भूकंप-संवेदनशील जोन में आता है। लोगों का तर्क है कि परियोजना से भूकंप या भूस्खलन जैसी आपदा आ सकती है।
इसके अलावा सियांग नदी घाटी की जैव विविधता, जंगल, स्थानीय लोगों के रोजगार, विस्थापन और संस्कृति को लेकर भी चिंताएं हैं।
मांगें
क्या हैं लोगों की मांगें?
प्रदर्शनकारियों की 4 मुख्य मांगें हैं। इनमें गिरफ्तार किए गए 10 कार्यकर्ताओं को रिहा करना, निलंबित गांव के मुखियाओं को बहाल करना, परियोजना से प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) सर्वे बंद करना और इलाके में तैनात अर्धसैनिक व केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाया जाना शामिल है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि अभी केवल परियोजना की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है और किसी भी निर्माण से पहले जनता के हितों को ध्यान में रखा जाएगा।