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800 प्रतिशत ज्यादा PM2.5, भारी धातुओं के कण; दिवाली की रात कितनी प्रदूषित दिल्ली की हवा?
दिवाली की रात दिल्ली की हवा कितनी प्रदूषित रहती है, जानिए

800 प्रतिशत ज्यादा PM2.5, भारी धातुओं के कण; दिवाली की रात कितनी प्रदूषित दिल्ली की हवा?

लेखन आबिद खान
Nov 08, 2026
05:49 pm

क्या है खबर?

सर्दियों की शुरुआत होते ही दिल्ली में वायु प्रदूषण का मुद्दा जोर पकड़ने लगता है। दिवाली के दौरान प्रदूषण में खासी बढ़ोतरी होती है, क्योंकि पटाखों से निकलने वाले तत्व हवा को और खराब कर देते हैं। पटाखों में अलग-अलग रंग और धमाके के लिए कई रासायनिक तत्वों और भारी धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो हवा में मिल जाते हैं। आइए समझते हैं दिवाली की रात दिल्ली की हवा कितनी घातक होती है।

PM2.5

800 प्रतिशत तक बढ़ जाता है PM2.5

IIT बॉम्बे समेत कई अध्ययनों से पता चलता है कि दिवाली की रात दिल्ली की हवा में कुछ ही घंटों के भीतर PM2.5 का स्तर 300 से 800 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

रात 10 से 1 बजे के बीच शहरी क्षेत्रों में PM2.5 की प्रति घंटा सांद्रता 800 से 1,000 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाती है। ये सुरक्षित मानकों से 15 गुना से भी ज्यादा है।

भारी धातुएं

हवा में भारी धातुओं का स्तर भी बढ़ता है

दिवाली के दौरान आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं से PM2.5 तत्वों का 85 प्रतिशत तक उत्सर्जन होता है।

इसके साथ ही नमूनों का विश्लेषण बताता है कि विषाक्त भारी धातुओं की मौजूदगी भी बढ़ जाती है। बेरियम की सांद्रता दिवाली से पहले के सामान्य स्तर की तुलना में 140 गुना से अधिक बढ़ जाती है, जबकि स्ट्रोंटियम का स्तर 450 गुना से अधिक हो जाता है।

जल में घुलनशील सल्फेट और नाइट्रेट की संख्या भी बढ़ जाती है।

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रिपोर्ट

85 प्रतिशत PM2.5  उत्सर्जन में पटाखों का योगदान

2024 में जर्नल एटमॉस्फेरिक एनवायरमेंट में प्रकाशित एक अध्ययन में 2019, 2020 और 2021 के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

इसके मुताबिक, दिवाली के दौरान हवा में मौजूद PM2.5 के कुल भार में पटाखों का योगदान 85 प्रतिशत से ज्यादा था।

2022 में किए गए एक अध्ययन में भी पटाखों के प्रभाव का विश्लेषण किया गया था। इसमें सामने आया कि हवा में मौजूद PM2.5 का करीब 95 फीसदी हिस्सा पटाखों से जुड़ा था।

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पटाखे

पटाखों में इस्तेमाल होती हैं भारी धातुएं

दरअसल, पटाखों में अलग-अलग रंग की रोशनी के लिए अलग-अलग भारी धातुओं का इस्तेमाल होता है। स्ट्रोंटियम से गहरा लाल रंग, बेरियम से चमकीला हरा रंग, तांबे से नीला रंग और सोडियम से चमकीला पीला मिलता है।

इसके अलावा पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर और चारकोल का भी इस्तेमाल पटाखों में होता है। पटाखों के फूटने पर सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसों के साथ-साथ भारी मात्रा में बारीक कण भी निकलते हैं।

AQI

दिल्ली में AQI पहले से 400 के करीब

आज सुबह पूरे दिल्ली-NCR को धुंध की घनी चादर ने ढंक लिया है। राजधानी के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता 'अत्यंत खराब' श्रेणी में बनी हुई है।

ज्यादातर जगहों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के करीब दर्ज किया गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, इंडिया गेट के आसपास AQI 398 रहा, जबकि अक्षरधाम मंदिर के आसपास 336 दर्ज किया गया। वहीं, आनंद विहार में यह 328 रहा। सभी आंकड़े 'अत्यंत खराब' श्रेणी में आते हैं।

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