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#NewsBytesExplainer: बांग्लादेश में BNP की जीत के भारत के लिए क्या हैं मायने?
बांग्लादेश चुनावों में BNP ने जीत दर्ज की है

#NewsBytesExplainer: बांग्लादेश में BNP की जीत के भारत के लिए क्या हैं मायने?

लेखन आबिद खान
Feb 13, 2026
02:51 pm

क्या है खबर?

बांग्लादेश के आम चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BNP ने 300 में से 209 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है और सरकार बनाने जा रही है। भारत का पड़ोसी देश होने के साथ हालिया समय में संबंधों में तनाव के नजरिए से भारत की नजरें बांग्लादेश चुनावों पर थी। आइए जानते हैं BNP के भारत के लिए क्या मायने हैं।

पिछले संबंध

खालिदा जिया के कार्यकाल में कैसे थे भारत-बांग्लादेश संबंध?

तारिक से पहले BNP का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया करती थीं। उन्होंने 3 बार शासन किया। आमतौर पर भारत उनके शासन को कम भरोसेमंद और सहयोगात्मक मानता था। उनके कार्यकाल में संबंधों में हल्का तनाव और रणनीतिक सहयोग सीमित रहा। सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज (ISAS) के मुताबिक, BNP की बयानों में अक्सर भारतीय पहलों को वर्चस्ववादी और असमान बताया जाता था, पारगमन व्यवस्थाओं का विरोध किया जाता था और अनसुलझे विवादों को उजागर किया जाता था।

शासन

जिया पर विद्रोही समूहों का समर्थन करने के आरोप

जिया के शासनकाल में ढाका ने कथित तौर पर यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA), नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (NSCN) और अन्य विद्रोही समूहों को शरण, प्रशिक्षण और रसद सहायता प्रदान की। मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान के मुताबिक, "इन समूहों ने भारत में हमले शुरू करने के लिए बांग्लादेशी क्षेत्र का इस्तेमाल किया।" रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि जिया ने पूर्वोत्तर में इन विद्रोही समूहों और अलगाववादी आंदोलनों को 'स्वतंत्रता सेनानी' कहा था।

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विदेश नीति

तारिक ने विदेश नीति को लेकर क्या संकेत दिए हैं?

चुनाव से पहले BNP द्वारा जारी एक दस्तावेज के मुताबिक, BNP किसी दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और न ही कोई सुरक्षा खतरा पैदा करेगी। हालांकि, कोई देश बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा या किसी तरह का खतरा पैदा करेगा तो कड़ा प्रतिरोध किया जाएगा। दस्तावेज में कहा गया है, "विदेशी संबंधों में बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। BNP मुस्लिम उम्मत और पड़ोसी देशों के साथ विशेष संबंध स्थापित करेगी।"

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विकल्प

क्यों BNP भारत के लिए सबसे अच्छा विकल्प है?

BNP के अलावा दूसरी प्रतिद्वंद्वी पार्टी जमात-ए-इस्लामी थी। शेख हसीना के शासन में इस पर प्रतिबंध था और भारत को लेकर इसका रुख अच्छा नहीं है। लाइव मिंट के मुताबिक, "भारत के लिए BNP का सत्ता में आना सबसे अच्छा विकल्प है। जमात के आने का मतलब बांग्लादेश और भारत दोनों के लिए एक नई वास्तविकता होती। BNP पहले भी सत्ता में रह चुकी है। दिल्ली और ढाका के बीच बातचीत हुई है, हालांकि संबंध बहुत अच्छे नहीं रहे हैं।"

शरण

भारत के लिए परेशानी बन सकता है हसीना की शरण का मुद्दा

फिलहाल हसीना ने भारत में शरण ले रखी है। BNP नेताओं ने कहा है कि भारत में उनकी उपस्थिति द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है। खुद तारिक ने स्वयं इसे एक ऐसी राजनीतिक वास्तविकता बताया था, जिसे भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता। बिजनेस टुडे के मुताबिक, तारिक का कहना है कि अगर भारत किसी तानाशाह को शरण देता है, तो उसे बांग्लादेशियों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। भारत के लिए ये मुद्दा परेशानी का कारण बन सकता है।

अगला कदम

दोनों देशों के संबंधों को लेकर क्या है आगे की राह?

जानकारों का मानना है कि दोनों देशों ने हाल ही में नई शुरुआत करने का इरादा दिखाया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारिक को सबसे पहले जीत की बधाई दी है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण डोंथी ने कहा, "यह इस बात का संकेत है कि अगर नई सरकार भी ऐसा ही इरादा रखती है तो भारत छोटे कदम उठाने को तैयार है।"

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