पश्चिमी घाट के 56,000 वर्ग किलोमीटर इलाके को ESA घोषित करने का मामला अटका, जानिए कारण
पश्चिमी घाट के 56,000 वर्ग किलोमीटर इलाके को इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया (ESA) घोषित करने का जो ड्राफ्ट था, उसकी सोमवार को समय सीमा पूरी हो गई। दरअसल, गुजरात, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्य इस बात पर सहमत नहीं हो पाए कि किन इलाकों को इसमें शामिल किया जाए और वहां कौन से नियम लागू हों। इस ड्राफ्ट का मकसद यूनेस्को की इस खास विश्व धरोहर स्थल को बचाना था, लेकिन राज्यों के बीच सहमति न बन पाने से फिलहाल यह मामला अटक गया है।
पर्यावरण मंत्रालय संजय कुमार कमेटी से कर रहा है सलाह-मशविरा
पर्यावरण मंत्रालय ने हालांकि अभी हार नहीं मानी है। मंत्रालय ने वन महानिदेशक (सेवानिवृत्त) संजय कुमार की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ कमेटी के साथ मिलकर सभी राज्यों से बातचीत शुरू की है, ताकि कोई साझा रास्ता निकाला जा सके। मंत्रालय का लक्ष्य है कि एक नया ड्राफ्ट तैयार किया जाए। अगर इस नए ड्राफ्ट को मंजूरी मिलती है, तो ई एस ए का दर्जा मिलने के बाद खनन और बड़े विकास प्रोजेक्टों पर और भी कड़े नियम लागू होंगे, ताकि ये लुप्तप्राय पारिस्थितिकी तंत्र भविष्य के लिए सुरक्षित रह सकें।