ममता बनर्जी SIR मामले पर कल सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगी, चुनाव आयुक्त को कोसा
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस (SIR) की प्रमुख ममता ने राज्य में चुनाव आयोग के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है, जिस पर कल सुनवाई होनी है। इस दौरान कोर्ट में SIR प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाने वाली अन्य याचिकाओं को भी शामिल किया जाएगा। मामले पर सुनवाई 4 फरवरी को तय है।
सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा संबंधी मंजूरी दी
बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग का मामला अदालत की 4 फरवरी की कंप्यूटरीकृत सुनवाई सूची में दर्ज है। दो दिन पहले यह सुनवाई 6 फरवरी की सूची में थी। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री बनर्जी के पेश होने से पहले सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा विभाग ने उनकी मौजूदगी के लिए मंजूरी मांगी गई थी, जो दे दी गई है। बनर्जी जेड+ श्रेणी की संरक्षित नागरिक हैं। मुख्यमंत्री अभी दिल्ली में ही हैं।
आपत्ति
याचिका में क्या है आपत्ति?
मुख्यमंत्री बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के संशोधन के लिए चल रही SIR की वैधता को चुनौती देते हुए 28 जनवरी को याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने संशोधन के तरीके पर आपत्ति जताई और आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और तानाशाही का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया भारतीय चुनावी इतिहास में पहली बार, SIR के दौरान राज्य में 8,100 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को तैनात किया था। बता दें कि पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव है।
मुलाकात
मुख्य चुनाव आयुक्त से सोमवार को कर चुकी हैं मुलाकात
इससे पहले मुख्यमंत्री बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ SIR को लेकर बैठक की थी और यह आरोप लगाते हुए वॉकआउट कर दिया कि वह "अहंकारी" हैं और भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं। हालांकि, आयोग के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपने द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आयोग अधिकारियों की प्रतिक्रिया सुने बिना ही आयोग छोड़ दिया। मुख्यमंत्री काली शॉल ओढ़कर SIR प्रभावित परिवारों के साथ आयुक्त से मिलने पहुंची थीं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस
मुख्यमंत्री बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आयोग को घेरा
मुख्यमंत्री बनर्जी ने मंगलवार को SIR प्रभावित परिवारों के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आयोग ने बंगाल में पहले चरण में 58 लाख नाम हटा दिए, वे पीड़ितों को फॉर्म नंबर-6 भरकर अपना बचाव करने का कोई मौका भी नहीं दे रहे हैं...सिर्फ 58 लाख नाम एकतरफा हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो जिंदा हैं लेकिन उन्हें मरा हुआ दिखाया गया है।
पत्र
चुनाव आयोग ने 6 पत्रों का जवाब नहीं दिया
मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग को SIR के मुद्दे पर कुल 6 पत्र लिखे थे, लेकिन उन्होंने किसी का जवाब नहीं दिया। जब हमारे लोग आयोग के प्रतिनिधिमंडल से मिले, तो भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इससे पहले बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने आज तक ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त नहीं देखा। वह इस तरह से चिल्लाकर बात करते हैं, जैसे वह कोई जमींदार हों और हम सब उनके नौकर हों।
सुनवाई
I-PAC से जुड़ी सुनवाई 10 फरवरी तक स्थगित
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दायर राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के कार्यालय पर छापेमारी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई होनी थी, जिसे टाल दिया गया है। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई को 10 फरवरी तक के लिए स्थगित किया है। याचिका में आरोप है कि बंगाल सरकार ने कार्यालय और निदेशक प्रतीक जैन के परिसर में कोयला चोरी घोटाले से जुड़ी छापे में बाधा डाली थी। मामले में राज्य सरकार ने समय मांगा है।