इतिहास में पहली बार जापानी फाइटर जेट भारतीय धरती पर उतरे, आखिर क्यों हुआ ऐसा?
भारत और जापान ने हाल ही में अपना संयुक्त वायु सेना अभ्यास 'वीर गार्जियन 2026' पूरा कर लिया है। इस साल का अभ्यास बहुत खास रहा, क्योंकि यह पहली बार था जब जापानी फाइटर जेट भारतीय धरती पर उतरे।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इसे भारत-जापान रक्षा संबंधों और साझेदारी के इतिहास में एक बड़ा पड़ाव बताया।
यह घटना दिखाती है कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए मिलकर काम करने को लेकर कितने गंभीर हैं।
जोधपुर में ट्रेनिंग, यूनिकोर्न और फाइटर जेट पर बातचीत
जोधपुर एयर फोर्स बेस पर दोनों देशों के कर्मियों ने कंधे से कंधा मिलाकर ट्रेनिंग की। इस दौरान उन्होंने एक-दूसरे की रणनीतियां सीखीं और मिलकर मुश्किल मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
यह अभ्यास एक बड़ी साझेदारी का हिस्सा है, जिसमें यूनिकोर्न मास्ट सिस्टम जैसे संयुक्त तकनीकी प्रोजेक्ट और एक नया समुद्री सुरक्षा समझौता भी शामिल हैं।
इतना ही नहीं, भारत के जापान के अगली पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल होने की भी चर्चा चल रही है, जिससे भविष्य में और भी उन्नत तकनीकी सहयोग की उम्मीद बढ़ गई है।
जापानी वायुसेना प्रमुख जनरल ताकेहिरो मोरिता ने पायलट के साथ तेजस जेट में उड़ान भरी, जबकि एयर चीफ मार्शल सिंह ने तेजस जेट में अकेले उड़ान भरी।
यह अभ्यास 9 से 22 सितंबर तक जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर आयोजित हो रहा है। इसमें भारतीय वायुसेना के स्वदेशी ‘तेजस’, ‘सुखोई-MKI ‘ और ‘राफेल’ जैसे अग्रिम पंक्ति के विमान शामिल हैं, जबकि जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स की ओर से F-2A लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं।