धारली त्रासदी के बाद उत्तराखंड की बड़ी तैयारी: मानसून से पहले बन रहा खतरे का नक्शा
2026 का मानसून आने में अभी वक्त है, लेकिन उत्तराखंड पहले से ही उन बस्तियों की पहचान करने में लगा है जिन पर बाढ़ और भूस्खलन का सबसे ज्यादा खतरा है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि ये सर्वे लगातार चल रहे हैं। उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में यह सर्वे किया जा रहा है। खासकर, चमोली में संभावित खतरे वाले इलाकों की जल्द पहचान के लिए सेटेलाइट इमेजिंग और ड्रोन मैपिंग की मदद ली जा रही है।
उत्तराखंड के धारली में आई बाढ़ में 67 लोग लापता
उत्तराखंड का पहाड़ी भूगोल और तेज़ी से बढ़ रहा शहरीकरण, भारी बारिश के दौरान इसे खास तौर पर संवेदनशील बना देता है। पिछले साल धारली में आई अचानक बाढ़ में 67 लोग लापता हो गए थे। यह दुखद घटना याद दिलाती है कि ऐसे सर्वे कितने जरूरी हैं। एक बार जब ये सारे डेटा इकट्ठा हो जाएंगे, तो अधिकारी उच्च जोखिम वाले इलाकों पर खास ध्यान देंगे ताकि इस मानसून में वहां के लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।